खेती एक गतिविधि के तौर पर हमारे सकल घरेलू उत्पाद में करीब 1/6वां योगदान करती है तथा हमारी जनसंख्या का बड़ा भाग अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर है। बिगड़ती मृदा सेहत चिंता का विषय बन गई है तथा इसकी वजह से कृषि संसाधनों का अधिकतम उपयोग नहीं हो पा रहा है। उर्वरकों का असंतुलित उपयोग, जैविक तत्वों के कम इस्तेमाल तथा पिछले वर्षों में घटते पोषक तत्वों की गैर प्रतिस्थापना के परिणामस्वरूप देश के कुछ भागों में पोषक तत्वों की कमी हुई है तथा मृदा उर्वरता भी घट गई है।
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