नरेंद्र मोदी की सरकार को पूरा एक दशक बीत चुका है। ऐसे में क्या यह संभव है कि उन्होंने कोई गलती की ही न हो! निश्चित रूप से उनके कार्यकाल में कई गलतियां हुईं हैं, तो विपक्ष उन गलतियों को भांपने में नाकाम क्यों रहा है?
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नरेंद्र मोदी की सरकार को पूरा एक दशक बीत चुका है। ऐसे में क्या यह संभव है कि उन्होंने कोई गलती की ही न हो! निश्चित रूप से उनके कार्यकाल में कई गलतियां हुईं हैं, तो विपक्ष उन गलतियों को भांपने में नाकाम क्यों रहा है?
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भारत जैसे स्वस्थ लोकतंत्र में जनता हरदम विकल्प तलाश करती है। अरविंद केजरीवाल एक ऐसे ही विकल्प बनकर उभरे थे। केजरीवाल ने कांग्रेस और भाजपा से बराबर दूरी का वादा किया और जनता ने उनके इस विचार को हाथोंहाथ ले लिया।
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अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा आयोजन के बहाने देश में राममयी संस्कृति के रचे-बसे होने के कई प्रमाण मिले हैं। लेकिन, क्या वजह है कि देश का मौजूदा विपक्ष इन्हें पहचानने और समझने से इनकार कर देता है?
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इतिहास निर्माण की प्रक्रिया में दोष नीतियों का नहीं होता है, बल्कि नियंताओं का होता है। नियंताओं द्वारा नीतियों के कार्यान्वयन में हुई त्रुटियां सभ्यताओं को बहुत भारी पड़ती है...
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श्री राम मंदिर मामले में कांग्रेस इतनी बड़ी गलती कैसे कर गई? श्री राम मंदिर मामले में संघर्ष की गाथा साढ़े पांच सौ साल पुरानी है, फिर कांग्रेस यह आंकड़ा कैसे भूल गई?
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में तीन मंदिरों का विवाद था। इनमें से काशी और अयोध्या के विवाद हल हो चुके हैं। अब बारी कृष्ण जन्मभूमि की है। क्या अगले पांच साल में यह लक्ष्य भी प्राप्त हो जाएगा?
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भविष्य में भारत की राजनीति किस करवट बैठेगी? भारतीय जनता पार्टी को विपक्ष के रूप कौन दे पाएगा टक्कर...। विस्तार से जानिए वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी और मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार के बीच हुई इस बातचीत में...।
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इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध अगले तीन महीने तक भी खिंच सकता है और यदि यह युद्ध इसी तरह तीव्रतर होता चला गय़ा तो यह इस्लाम धर्म के पतन की एक शुरुआत भी हो सकता है। युद्ध की मौजूदा स्थिति के बार में विस्तार से जानिए वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी और मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार के बीच हुई इस बातचीत में...
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कोरोना के चलते 'पांच ट्रिलियन डॉलर' की अर्थव्यवस्था के सपने को एक बड़ी चोट पहुंची है। अब इसे लेकर सरकार द्वारा उठाए गए आगामी 'ठोस' कदम ही तय करेंगे कि यह 'सपना' सिर्फ सपना ही रहेगा या कोई मूर्त रूप ले पाएगा। इस विषय पर विस्तार से बता रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार...
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आपद काल में छोटी बचतें कितनी कारगर साबित हो सकती हैं, बता रहे हैं वित्त नियोजक अभिनव गुप्ता। पूरा आलेख पढ़ने, वीडियो देखने, पोडकास्ट सुनने और अपनी राय व्यक्त करने के लिए महज एक रुपये में सब्सक्राइब करें, दिनभर के लिए...
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