FDI: जब नरेंद्र मोदी जोर-शोर से बरसे थे मनमोहन सिंह पर

FDI: जब नरेंद्र मोदी जोर-शोर से बरसे थे मनमोहन सिंह परनई दिल्ली । विदेशी निवेश भारत में बडा राजनीतिक मुद्दा रहा है। सोमवार को भारत सरकार ने रक्षा, विमानन और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी का ऎलान कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले के बाद टि्वटर पर बयानों की बहार सी आ गई। लेकिन इनमें भाजपा के कथित दोहरे मापदंडों को भी उजागर कर दिया। 

 

सोमवार को वरिष्ठ पत्रकार मिनहाज मचेंट का ट्वीट था, मोदी सरकार का पहला बडा आर्थिक सुधार। विमानन, ई-कॉमर्स और डिफेंस में 100 प्रतिशत एफडीआई, फार्मा में 74 प्रतिशत। वरिष्ठ पत्रकार माधवन नारायणन ने ट्वीट किया, रघुराम राजन के जाने के डर के माहौल में विमानन और रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई का बडा फैसला। बाजार को रिझाने के लिए एनडीए ने अच्छा दाव खेला। निकुंज शाह ने लिखा, कांग्रेस जो 60 साल में नहीं कर पाई, मोदी सरकार ने दो साल में कर दिया। 

 

बडे सुधार लागू करते हुए सरकार ने 100 प्रतिशत विदेशी निवेश लागू किया। लेकिन ये भी सच है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी जब विपक्ष में थी तो एफडीआई की प्रखर विरोधी थी। इसीलिए आज के केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर का जुलाई 2013 में किया गया एक ट्वीट भी सोमवार को ख़ूब शेयर किया गया। 

 

जावडेकर ने बताए थे खतरे... 

 

इस ट्वीट में जावडेकर ने रक्षा क्षेत्र में एफ़डीआई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा था, टेलीकॉम और रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश से सुरक्षा के लिए खतरे पैदा हो सकते हैं और इसके तहत नवीनतम तकनीक मिलने की गारंटी भी नहीं है। वहीं जुलाई 2013 में ही किए गए एक ट्वीट में भाजपा महिला मोर्चा की नेता प्रीति गांधी ने लिखा था, रक्षा और मीडिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाज़ार को बढावा देने के लिए एफडीआई बढाने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। डॉ राकेश पारिख ने ट्वीट किया, अब हमें विदेशी निवेश के मुद्दे पर सुषमा स्वराज और अन्य नेताओं के यूपीए काल के दौरान संसद में दिए बयानों को फिर से सुनना चाहिए। 

 

नरेंद्र मोदी के तब के ट्वीट... 

 

और तो और,तब के गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी ने भी यूपीए के दौरान एफडीआई का विरोध किया था। दिसंबर 2012 में किए गए एक ट्वीट में मोदी ने लिखा था, कांग्रेस राष्ट्र को विदेशियों को सौंप रही है। ज्यादातर पार्टियां एफडीआई का विरोध कर रही हैं लेकिन सीबीआई के डर की वजह से उन्होंने मतदान नहीं किया और कांग्रेस पिछले दरवाजे से जीत गई। मोदी ने सितंबर 2012 में एक अन्य ट्वीट में कहा था,असम और एफडीआई का मुद्दा बताता है कि हमारे प्रधानमंत्री ने हमारे लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ दी है। विदेशियों की सरकार, विदेशियों के द्वारा, विदेशियों के लिए। 

 

साभार-khaskhabar.com

 


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