भारत के विभिन्न मंदिरों में कई ऐसे चमत्कार हैं जिनका रहस्य विज्ञान आज भी सुलझा नहीं पाया है। ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर ग्वालियर से 70 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे भिंड जिले के दंदरौआ सरकार धाम में है। तहसील मेंहगांव के ग्राम धमूरी और चिरोल के मध्य यह धाम स्थित है।
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान हनुमान अपने भक्तों का स्वयं इलाज करते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान हनुमान के पास सभी प्रकार के रोगों का कारगर इलाज है। यही कारण है कि यहां दूर-दूर से लोग अपनी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों का तो यह भी दावा है कि यहां पर कैंसर जैसी बीमारी का इलाज भी भगवान खुद करते हैं। यहां हर दिन अच्छी सेहत की उम्मीद लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां काफी भीड़भाड़ रहती है।
श्रद्धालुओं का दर्द दूर करने वाले हनुमान को पहले ‘दर्दहरौआ’ कहा जाने लगा, जो कि बाद में अपभ्रंश होकर ‘दंदरौआ’ हो गया।इस मंदिर को लोग दंदरौआ सरकार धाम के नाम से भी जानते हैं। यहां बजरंगबली को डॉक्टर के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर में जो भी भक्त दर्शन करने आते है, वे हमेशा स्वस्थ रहते है। यहां हनुमान की मूर्ति नृत्य की मुद्रा में है। बताया जाता है कि यह देश की अकेली ऐसी मूर्ति है, जिसमें हनुमान को नृत्य करते हुए दिखाया गया है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण करीब 300 साल पहले हुआ था। यहां स्थापित गोपीवेशधारी हनुमान की मूर्ति एक पेड़ को काटने पर प्राप्त हुई थी।
इसके पीछे की कहानी को लेकर मान्यता है कि अशोक वाटिका में बैठी सीता से विदाई लेकर हनुमान ने जब भगवान श्रीराम से भेंट की तो उस दिन भाद्रपद मास का अंतिम मंगलवार था। तभी से यह दिन ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। किंवदंतियों के अनुसार ‘‘ऊँ श्री ददरौआ हनुमते नम:’’ मंत्र का दिव्य जाप करने से सभी तरह की आधि-व्याधियां मिटती हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के हनुमान स्वयं अपने एक भक्त का इलाज करने डॉक्टर बनकर यहां आए थे। हनुमान जिसका इलाज करने यहां आए थे वह एक साधु था। लंबे समय से उसको कैंसर था।उसे हनुमान ने मंदिर में डॉक्टर के वेश में दर्शन दिए थे। वह गर्दन में आला डाले थे, जिसके बाद साधु पूरी तरह स्वस्थ हो गया। श्रद्धालुओं का मानना है किडॉ. हनुमान के पास सभी प्रकार के रोगों का कारगर इलाज है।
मंदिर में कोई दवा व जड़ी बूटी नहीं दी जाती है। केवल एक छोटी सी पूड़िया में मंदिर की भभूति दी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यही भभूति दवा का काम करती है। मंदिर प्रागंण के गुरुकुल में बच्चों को वेदपाठन की शिक्षा दी जाती है। यहां स्थित भोजनशाला में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी बनाई जाती है।हर साल यहां बुढ़वा मंगल-मेला महोत्सव का विशाल आयोजन किया जाता है।
ग्वालियर के मुरार बारादरी से बड़ागांव, हस्तिनापुर व उटीला होकर मेहगांव स्थित इस स्थान तक पहुंचा जा सकता है। मंगलवार को बारादरी मुरार से शेयरिंग टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। मालनपुर-गोहद होकर भी दंदरौआ धाम पहुंचा जा सकता है। डबरा से मऊ होकर दंदरौआ धाम की दूरी 67 किलोमीटर के लगभग है। भिंड जिले से भी दंदरौआ धाम पहुंचा जा सकता है। इटावा, कानपुर से आने वाले लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।






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