भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने की तैयारी कर रहे जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आईपीओ ने पहले ही दिन निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। देश के अब तक के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम के रूप में पेश किए गए इस आईपीओ को संस्थागत निवेशकों का जबर्दस्त समर्थन मिला है। हालांकि, खुदरा निवेशकों की शुरुआती प्रतिक्रिया संस्थागत निवेशकों की तुलना में कमजोर रही। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आवेदन के दौरान दिखा उत्साह शेयर बाजार में लिस्टिंग के समय भी बरकरार रहेगा? सवाल यह भी है कि निवेशकों को अपने निवेश पर कितना लाभ मिल सकता है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की डिजिटल और दूरसंचार सेवाओं से जुड़ी इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ बुधवार को खुला। कंपनी इस निर्गम के जरिए करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया गया है। ऊपरी मूल्य पर कंपनी का मूल्यांकन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये बनता है। इस आकार के कारण यह भारतीय पूंजी बाजार के सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार केवल मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। इसके कारोबारी ढांचे में मोबाइल ब्रॉडबैंड, 5जी नेटवर्क, फाइबर ब्रॉडबैंड, एयरफाइबर, उद्यमों के लिए डिजिटल समाधान और भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तथा क्लाउड सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं शामिल हैं। कंपनी की सहायक इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम देश के दूरसंचार बाजार में प्रमुख स्थान रखती है। गत जून महीने तक इसके ग्राहकों की संख्या लगभग 53.33 करोड़ थी। इतने बड़े ग्राहक आधार और देशव्यापी नेटवर्क के कारण यह कंपनी को डिजिटल सेवाओं के विस्तार का एक अवसर है।
आईपीओ के जरिए जारी किए जा रहे नए शेयरों से प्राप्त रकम का एक बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज के भुगतान में इस्तेमाल किया जाना है। इससे समूह की दूरसंचार इकाई की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और भविष्य के विस्तार के लिए संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, निवेशकों को यह भी समझना होगा कि कंपनी का बड़ा आकार और मजबूत ब्रांड अपने आप में शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं हैं। अंततः कारोबार की वृद्धि, मुनाफे में सुधार और शेयर के मूल्यांकन की अहम भूमिका होगी।
आईपीओ के पहले दिन की सदस्यता के आंकड़ों ने बाजार में उत्साह का संकेत दिया। निर्गम खुलने के लगभग 100 मिनट के भीतर ही इसे पूरी तरह सब्सक्राइब कर लिया गया था। पहले दिन कारोबार समाप्त होने तक निवेशकों ने उपलब्ध शेयरों की तुलना में लगभग 3.16 गुना मांग दर्ज कराई।
संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में सबसे अधिक मांग देखने को मिली। योग्य संस्थागत खरीदार श्रेणी को 9.42 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में सदस्यता 1.68 गुना रही, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी पहले दिन 0.73 गुना पर थी। मौजूदा शेयरधारकों की आरक्षित श्रेणी में 1.46 गुना और कर्मचारियों की श्रेणी में 1.36 गुना सदस्यता दर्ज की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि शुरुआती मांग का प्रमुख आधार बड़े संस्थागत निवेशक रहे।
आज सुबह 11 बजे तक आईपीओ को कुल 3.48 गुना सब्सक्रिप्शन मिला गया। इसमें संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 9.42 गुना, गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 2.34 गुना और रिटेल निवेशकों की श्रेणी में 1.03 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। वहीं, कर्मचारियों की श्रेणी में 1.61 गुना और मौजूदा शेयरधारकों की श्रेणी में 2.06 गुना आवेदन प्राप्त हुए। संस्थागत निवेशकों की ओर से मजबूत मांग के साथ रिटेल निवेशकों का आरक्षित हिस्सा भी पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया।
संस्थागत खरीदार श्रेणी में विदेशी संस्थागत निवेशकों, घरेलू वित्तीय संस्थानों और म्यूचुअल फंडों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। बड़े संस्थागत निवेशकों की इतनी तेज प्रतिक्रिया को इस बात के संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि जियो के कारोबार और भविष्य की विकास संभावनाओं में बाजार की दिलचस्पी है। आईपीओ 23 अक्टूबर तक खुला है, अंतिम तस्वीर आना अभी बाकी है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि जियो का शेयर किस कीमत पर सूचीबद्ध हो सकता है। आईपीओ खुलने से पहले ग्रे मार्केट में शेयर के लिए मजबूत प्रीमियम की चर्चा थी। 20 अक्टूबर के आसपास उपलब्ध रिपोर्टों में करीब 247 रुपये प्रति शेयर के ग्रे मार्केट प्रीमियम का उल्लेख किया गया था। यदि इस प्रीमियम को 1,119 रुपये के ऊपरी निर्गम मूल्य में जोड़ दिया जाए, तो संकेतात्मक कीमत लगभग 1,366 रुपये बनती है। इस स्तर पर गणना करने से निर्गम मूल्य के मुकाबले लगभग 22 प्रतिशत की संभावित बढ़त निकलती है।
लेकिन, इस गणना को वास्तविक लिस्टिंग मूल्य का पूर्वानुमान नहीं समझना चाहिए। ग्रे मार्केट अनौपचारिक और अनियमित बाजार है, जहां प्रीमियम तेजी से बदल सकता है। आईपीओ की अंतिम सदस्यता, शेयर बाजार का रुख, लिस्टिंग से पहले की मांग और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता वास्तविक कीमत को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, 1,366 रुपये का स्तर केवल उस समय बताए गए प्रीमियम पर आधारित संकेत है, न कि यह कोई निश्चित लक्ष्य है।
ब्रोकरेज एजेंसियों के अनुमानों में भी जियो के प्रति सकारात्मक रुख दिखाई देता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का विशाल ग्राहक आधार, दूरसंचार बाजार में मजबूत स्थिति और ब्रॉडबैंड तथा डिजिटल सेवाओं में विस्तार की क्षमता आगे कारोबार को बढ़ाने में मदद कर सकती है। बाजार में उपलब्ध विश्लेषणों में लिस्टिंग पर करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की संभावित बढ़त का अनुमान भी सामने आया है। हालांकि, वास्तविक प्रदर्शन इससे अलग हो सकता है।
लंबी अवधि के नजरिये से कंपनी की सबसे बड़ी संभावनाओं में मोबाइल सेवाओं से औसत आय बढ़ाना, ग्राहकों को 2जी से बेहतर नेटवर्क और सेवाओं की ओर लाना, घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाना तथा कारोबारों को क्लाउड और एआई आधारित समाधान उपलब्ध कराना शामिल है। जियोफाइबर और जियोएयरफाइबर के विस्तार से कंपनी को मोबाइल सेवाओं से आगे बढ़कर घरेलू इंटरनेट बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। एआई और क्लाउड सेवाओं का व्यावसायिक विस्तार भी भविष्य में अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बन सकता है, बशर्ते कंपनी इन अवसरों को लाभदायक कारोबार में बदल सके।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। दूरसंचार नेटवर्क और स्पेक्ट्रम में निवेश की जरूरत लगातार बनी रहती है। प्रतिस्पर्धा, नियामकीय बदलाव, ग्राहकों से मिलने वाली औसत आय में अपेक्षित वृद्धि न होना और नई डिजिटल सेवाओं को बड़े पैमाने पर कमाई का स्रोत बनाने में देरी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि राजस्व बढ़ने के साथ मुनाफा और नकदी प्रवाह किस गति से बढ़ते हैं।
जियो के आईपीओ का मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण है। निर्गम मूल्य पर कंपनी का मूल्यांकन उसके वित्त वर्ष 2025-26 के मुनाफे के मुकाबले लगभग 31.7 से 33.3 गुना और एबिटा के मुकाबले लगभग 15 से 15.6 गुना बताया गया है। कुछ ब्रोकरेज इसे कंपनी की विकास संभावनाओं के अनुरूप मानते हैं, जबकि ऐसे मूल्यांकन पर भविष्य की कमाई में लगातार वृद्धि की अपेक्षा भी जुड़ी हुई है। यदि कंपनी विकास के तय अवसरों का लाभ उठा पाती है, तो मौजूदा मूल्यांकन को समर्थन मिल सकता है; लेकिन अनुमानित वृद्धि कमजोर पड़ने पर शेयर की कीमत पर दबाव भी बन सकता है।
इसलिए, निवेशकों के लिए जियो आईपीओ को केवल लिस्टिंग के दिन होने वाले संभावित लाभ के आधार पर देखना उचित नहीं होगा। अल्पकालीन निवेशक को लिस्टिंग से पहले बाजार में बदलती मांग और कीमत के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक को कंपनी के ग्राहक आधार, प्रति ग्राहक औसत आय, ब्रॉडबैंड विस्तार, डिजिटल सेवाओं से होने वाली कमाई, पूंजीगत खर्च और कर्ज में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए।
जियो का आईपीओ निवेशकों को भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल कारोबार में भागीदारी का अवसर देता है। पहले दिन की मजबूत संस्थागत मांग ने इस निर्गम को लेकर उत्साह जरूर बढ़ाया है, लेकिन वास्तविक सफलता का फैसला शेयर की लिस्टिंग के साथ ही नहीं होगा। आने वाले वर्षों में कंपनी कितनी तेजी से अपने विशाल ग्राहक आधार को अधिक लाभदायक सेवाओं में बदलती है, यही उसके शेयर के दीर्घकालीन प्रदर्शन की सबसे अहम कसौटी होगी।
* अस्वीकरण : यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। प्रतिभूतियों और म्यूचुअल फंड्स में निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं, और पिछला प्रदर्शन भविष्य के परिणामों की गारंटी नहीं है। किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, ट्रेडिंग कॉल या जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है और यह प्रतिभूतियों को खरीदने या बेचने का प्रस्ताव या निवेश सलाह नहीं है। यह स्पष्ट करता है कि सभी निवेश निर्णय उपयोगकर्ता के स्वयं के जोखिम पर हैं और पूंजी हानि हो सकती है। उपयोगकर्ताओं को केवल इस जानकारी पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपना स्वतंत्र शोध करना चाहिए। मीडियाभारती और लेखक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, यानी सेबी, के साथ अधिकृत निवेश सलाहकार या परामर्शदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं। मीडियाभारती परिवार से जुड़े कुछ सदस्यों के व्यक्तिगत पोर्टफोलियो में यहां विमर्श किए गए शेयर हो सकते हैं। साझा किए गए विचार, रिपोर्ट और सिफारिशें केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। इन्हें निवेश, कानूनी या कर सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी वित्तीय स्थिति पर सावधानीपूर्वक विचार करें और निवेश निर्णय लेने से पहले परामर्श करें।
* इस लेख के कुछ अंश विभिन्न एजेंसी और वित्तीय रिपोर्ट से लिए गए हैं।

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