वरुण धवन ‘गोविंदा’ बनने की कोशिश क्यों करते हैं? यह सवाल इसलिए दिलचस्प है क्योंकि वरुण धवन के करियर को ध्यान से देखें तो जवाब उनकी अभिनय क्षमता में नहीं, बल्कि उनकी अभिनय-शैली के चुनाव में छिपा हुआ दिखाई देता है।
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दैनिक जागरण, अमर उजाला, नवभारतटाइम्स.कॉम और एनडीटीवीखबर.कॉम के रास्ते पत्रकारिता में पिछले दो दशक से ज्यादा समय से सक्रिय धर्मेंद्र कुमार मीडियाभारती वेब सॉल्युशन्स के प्रमुख हैं।
वरुण धवन ‘गोविंदा’ बनने की कोशिश क्यों करते हैं? यह सवाल इसलिए दिलचस्प है क्योंकि वरुण धवन के करियर को ध्यान से देखें तो जवाब उनकी अभिनय क्षमता में नहीं, बल्कि उनकी अभिनय-शैली के चुनाव में छिपा हुआ दिखाई देता है।
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भारतीय पुरुषों के लिए कमर का माप केवल सौंदर्य या कपड़ों की फिटिंग का विषय नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य का एक गहरा संकेतक भी है। शरीर में जमा चर्बी, विशेषकर पेट के आसपास की चर्बी, कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसी वजह से कमर की चौड़ाई और उसकी ऊंचाई के अनुपात को समझना बेहद ज़रूरी है...
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लैंडमार्क कार्स एक ऐसी कंपनी है जो भारत के ऑटो रिटेल सेक्टर में धीरे-धीरे अपनी मज़बूत पहचान बना रही है। यह सिर्फ़ कार बेचने का कारोबार नहीं, बल्कि एक पूरे इकोसिस्टम को गढ़ने की दिशा में काम कर रही है...
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भारतीय लोकतंत्र में पत्रकारिता और राजनीति का रिश्ता हमेशा से बहस का विषय रहा है। पत्रकारिता का धर्म है, सत्ता से सवाल करना और जनता के हित में सच को सामने रखना, जबकि राजनीति का धर्म है सत्ता प्राप्त करना और उसे बनाए रखना। इन दोनों के बीच का टकराव और सहयोग ही लोकतंत्र की असली धड़कन है...
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ईटर्नल का शेयर 600 से ऊपर के पी/ई अनुपात पर ट्रेड करता है, एक वैल्यूएशन जो बेदाग़ निष्पादन की मांग करता है। निवेशक सिर्फ़ कंपनी में नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल उपभोक्ता भविष्य के विज़न में निवेश कर रहे हैं।
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भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त यह है कि जनता जब चाहती है, तब अपनी आवाज़ को किसी आंदोलन में बदल देती है। कभी यह आवाज़ सत्ता को पलट देती है, कभी नई तरह की राजनीति को जन्म देती है और कभी व्यवस्था सुधार की मांग बन जाती है। जयप्रकाश नारायण का ‘इंदिरा हटाओ’ आंदोलन, अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का छात्र आंदोलन, तीनों इसी परंपरा की अलग-अलग कड़ियां हैं।
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