धर्मेंद्र कुमार

दैनिक जागरण, अमर उजाला, नवभारतटाइम्स.कॉम और एनडीटीवीखबर.कॉम के रास्ते पत्रकारिता में पिछले दो दशक से ज्यादा समय से सक्रिय धर्मेंद्र कुमार मीडियाभारती वेब सॉल्युशन्स के प्रमुख हैं।

कुछ गीत ऐसे होते हैं, जो अपनी लोकप्रियता की सभी सीमाएं लांघकर लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। वे केवल मनोरंजन का माध्यम ही नहीं रह जाते, बल्कि भावनाओं, यादों और रिश्तों की आवाज बन जाते हैं। वर्ष 1986 में प्रदर्शित और महेश भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म ‘नाम’ का गीत ‘चिट्ठी आई है...’ भी ऐसा ही एक गीत है। पंकज उधास की दर्द में डूबी आवाज, आनंद बख्शी के सरल लेकिन हृदयस्पर्शी शब्द और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का भावपूर्ण संगीत इस गीत को इतनी ऊंचाई पर ले गए, जहां पहुंचना हर गीतकार, संगीतकार और गायक का सिर्फ सपना होता है...

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कुछ फिल्में अपनी कहानी, प्रस्तुति और तकनीकी खूबियों के कारण दर्शक को बांध लेती हैं, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाती हैं कि अगर इसके कुछ किरदारों के लिए कलाकारों का चुनाव अलग होता तो क्या यह फिल्म कहीं ज्यादा प्रभावशाली हो सकती थी? ‘मैं वापस आऊंगा’ ऐसी ही फिल्म है। इसमें एक मजबूत कहानी, शानदार संपादन और कई प्रभावशाली अभिनय क्षण मौजूद हैं, लेकिन इसकी कास्टिंग कई जगह फिल्म की संभावनाओं को सीमित करती दिखाई देती है...

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कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं, जिन्हें सुनते हुए लगता है जैसे समय ठहर गया हो। जैसे, किसी पुराने महल की दीवारों में सदियों से कैद कोई प्रेमकथा अचानक सांस लेने लगी हो। जैसे, किसी विरहिणी के दिल में दबे हुए आंसू सुर बनकर बाहर आ गए हों। और, जैसे, संगीत के सामने राजसत्ता, वैभव और दुनिया की तमाम चकाचौंध छोटी पड़ गई हो।

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान मीरवाइज उमर फारूक से हुई मुलाकात ने भारत की कूटनीति और कश्मीर की राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। किसी ईरानी राष्ट्रपति का भारत की राजधानी में कश्मीर के एक प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक चेहरे से मिलना निश्चित रूप से सामान्य घटनाक्रम नहीं माना जा सकता है। इसके बावजूद, इस मुलाकात को केवल कश्मीर के नजरिए से देखना शायद ईरान की मौजूदा कूटनीतिक रणनीति को पूरी तरह समझने में मदद नहीं करेगा...

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शेयर बाजार में टाटा ग्रुप का नाम निवेशकों के भरोसे, कारोबारी विरासत और लंबे समय की संभावनाओं के साथ जुड़ा रहा है। लेकिन, मजबूत ब्रांड और प्रतिष्ठित कारोबारी समूह का हिस्सा होना किसी शेयर में मुनाफे की गारंटी नहीं है। पिछले कुछ समय में टाटा ग्रुप की कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट ने निवेशकों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा स्तर खरीदारी के अवसर हैं या निवेश के लिए अभी और इंतजार करना चाहिए...

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भारत में रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के विस्तार के साथ विशेष मिश्र धातुओं की मांग बढ़ने की उम्मीद ने मिश्र धातु निगम लिमिटेड यानी मिधानि को निवेशकों की नजर में एक महत्वपूर्ण कंपनी बना दिया है...

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