पीटर पैन 1902 में लिखे एक उपन्यास का नायक है। राहुल गांधी की छवि की तुलना अकसर 'पीटर पैन' से की जाती है, यानी, वह काल्पनिक लड़का जो बड़ा होने से लगातार इंकार करता है।
पीटर पैन कभी-कभी ज़िम्मेदारियों से बचते हुए रोमांच और आदर्शवाद की दुनिया में खोया रहता है, वैसे ही आलोचक कहते हैं कि राहुल गांधी भी राजनीति की कठोर यथार्थवादी दुनिया में पूरी तरह ‘परिपक्व नेता’ की भूमिका अपनाने से हिचकते नज़र आते हैं।
पीटर पैन की बाल सुलभ ऊर्जा उसे ‘नैवरलैंड’ का नायक बनाती है। संबंधित लेख के लिए क्लिक करें।






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