अधिकारियों को हडकाता था मथुरा हिंसा का मास्टरमाइंड

अधिकारियों को हडकाता था मथुरा हिंसा का मास्टरमाइंडमथुरा। यूपी में मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसा का मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव मारा जा चुका है। उसकी मौत के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। जवाहर बाग पर कब्जा जमाने यादव ने वहां अपनी अदालतें और जेल के बैरक तक बना लिए थे। जो लोग उसका कानून नहीं मानते थे, उन्हें वह सजा सुनाकर यातनाएं देता था।  यही नहीं रामवृक्ष आलाअधिकारियों को हडक़ाता भी था। रामवृक्ष की मौत के बाद सामने आए एक विडियो में वह समझौता कराने गए एडीएम पर बरसते नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक रामवृक्ष यादव की अगुआई में जवाहर बाग में एक समानांतर सरकार चलाई जा रही थी। ये लोग भारत के संविधान और कानून को नहीं मानते थे।

 

ट्रेनिंग के लिए बना रखी थी टीम

 

रामवृक्ष यादव के कैम्प में हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के लिए 20 लोगों की टीम थी। लोगों को फुसलाकर लाने के लिए 100 से ज्यादा ट्रेन्ड लोग थे। लोगों को एक वक्त का खाना मिलता था। यहां रामवृक्ष ने बैंक भी बना रखा था। जवाहरबाग में सस्ती दुकानें लगती थी और इसमें मथुरा शहर और गांव के लोग खरीदने आते थे।

 

लोगों को बंधक बनाकर रखता था

 

हिंसा में घायल एक शख्स ने बताया- यहां आने के बाद गलती का अहसास हुआ। मुझ जैसे कई लोगों को बंधक बनाया गया था। कई बार वापस अपने घर जाने की कोशिश की, लेकिन गेट पर तैनात उसके सिक्युरिटी वाले बाहर निकलने नहीं निकलने देते थे।

 

उम्र के हिसाब से मिलता था काम

 

हथियारों की ट्रेनिंग के लिए केवल 30 से 35 साल की उम्र के लोगों को ही चुना जाता था। इसके बाद के उम्र के लोगों को लाठी चलाना सिखाया जाता था। लाठी चलाना सिखाए जाने के दौरान ट्रेनर यह बताता था कि शरीर के सिर और पैर पर मारने से सामने वाला तुरंत काबू में आ जाएगा।

 

बाहरी आदमी या अधिकारी पर होता था हमला 

 

आगरा जोन के आईजी दुर्गा चरण मिश्रा के मुताबिक, जवाहर बाग के अंदर इन लोगों ने अलग सल्तनत खड़ी कर रखी थी। हथियारबंद लोगों के तीन-चार ग्रुप भी बना लिए थे, जिसे वे बटालियन कहते थे। अगर कोई बाहरी आदमी या अधिकारी बाग के भीतर जाता तो ये लोग उस पर हमला कर देते थे। जिन लोगों के पास खाने को रोटी और सिर छुपाने को छत नहीं थी, उन्हें आजाद भारत विधिक वैचारिक क्रांति सत्याग्रही नाम के संदिग्ध संगठन का मुखिया रामवृक्ष यादव अपनी कब्जाई सल्तनत में पनाह देता था। लोगों को सत्याग्रह का पाठ पढ़ाया जाता था। दिलचस्प ये है कि अंदर के लोग एक तरह से नजरबंद रहते थे। आईजी ने बताया कि रामवृक्ष अपने अनुयायियों को भी बाहर नहीं जाने देता था। किसी का करीबी मिलने आता था तो उसे लिखित परमिट के जरिए एक-दो दिन के लिए ही बाहर भेजा जाता था। क्या वहां नक्सली इलाकों से भी लोग आते थे, इस पर आईजी ने कहा कि हां बिल्कुल, वहां छत्तीसगढ़ से भी लोग आते थे। उनका मकसद लोगों को धार्मिक कट्टपंथ या धार्मिक आतंकवाद, आप इसे चाहे जो कह लें, की तरफ ले जाना था। वे अपनी करंसी शुरू करने की योजना भी बना रहे थे। 

 

तीन पुलिसवाले अब भी लापता 

 

जवाहरबाग के खूनी संघर्ष में तीन पुलिसकर्मी अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश हो रही है। गुरुवार को 280 एकड़ की जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान एसपी और एसओ समेत 24 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है। मृतकों में दो महिलाएं हैं। पुलिस ने 116 महिलाओं समेत 320 लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपियों की पहचान कर उन पर एनएसए लगाई जाएगी। 

 

साभार-khaskhabar.com

 

 

 


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