मथुरा। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष भगवान श्रीराधाकृष्ण चन्द्रकी पोशाक धारण करेंगे। चन्द्रमा, फूल-पत्ती, पुष्पाकृति, शंखाकृति एवं मयूराकृति मुख रूप से ठाकुरजी की पोषाक पर रेषम, रत्न एवं जरी से उकेरी जायेंगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रिया-प्रियतम के निज गर्भगृह की सज्जा भी अनूठी एवं निराली होगी, जहाॅं लाल पुष्प से ठाकुरजी की पिछवाई तैयार की जायेगी वहीं दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का उपयोग गर्भगृह की सज्जा में किया जायेगा। भगवान श्री तिरूपति बालाजी के श्रीविग्रह के बगल एवं पृष्ठभाग में उत्कीर्ण स्तम्भ एवं सिंहाकृति का प्रतिरूप भागवत भवन में स्थित श्रीविग्रह के समीप स्थापित किया जायेगा।
इस वर्ष जन्ममहाभिषेक स्थल पर पुष्प घण्ट बंगले का निर्माण जोर-शोर से चल रहा है। प्रथमवार जन्ममहोत्सव के बंगले के निर्माण में विदेशी अत्याधुनिक तकनीकी का समावेश किया गया है। इस आकृति एवं पुष्प बंगले के निर्माण में रोबोटिक मशीन का प्रयोग किया जा रहा है जिससे जो भी आकृति उकेरी जायेगी वह सजीव तो दिखेगी ही साथ ही उसका स्वरूप भी वास्तविकता का अनुभव करायेगा। बिल्कुल सजीव दिखने वाले घण्ट वास्तव में वजन में अत्यन्त हल्की सामग्री से तैयार किये जा रहे है। विदेशी तकनीकी एवं ब्रज की कला का एक अनूठा एवं अभिनव प्रयोग यह बंगला संभवतः ब्रज में श्रद्धालुओं को प्रथमवार देखने को मिलेगा। साज-सज्जा के लिए मुख्य सामग्री के निर्माण कार्य में गिलिप्टक आर्ट्स के कारीगर दिन-रात लगे हुये हैं।





