मथुरा। धार्मिक असहिष्णुता पर कुछ साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं फिल्म अभिनेताओं ने ठेका ले लिया है, इनको भारतवर्ष के सवा सौ करोड़ जनता से ज्यादा इनको भय सता रहा है। देश में असहिष्णुता और भयावह स्थिति नहीं है, धार्मिक असहिष्णुता पर बयान देने वाले अल्पसंख्यों की क्या स्थिति है, पड़ौसी देश में देखें, जहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं हैँ यह लोग कैसे जीवन यापन कर रहे है, साथ ही देश में कश्मीरी पंडितों की स्थिति पर नजर डालें जो आज बेधर हो चुके है, उनके घरों को उजाड़ दिया गया। घर छोड़कर भागना पड़ा, शरणार्थियों जैसा जीवन यापन कर रहे, यह स्थिति क्या असहिष्णुता का बयान देने वालों को नहीं दिखा। वर्षों भारत में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के लोग आज बेहतर रूप से जीवन यापन कर रहे और खुश है। भारत शुरू से सहनशील देश रहा है, यहां अनेक जाति, धर्म और पंथ संस्कृति के लोगों का संगम है। जहां सब लोग प्रेम भावना से रहते हैं। कुछ राजनैतिक पार्र्टियां अपने हित साधने के लिए असहिष्णुता का वातावरण पैदा करना चाहते है। फिल्म अभिनेता आमिर खान का बयान देश हित में न होकर समाज को काटने वाला बयान है, आमिर खान को जिस देश ने इज्जत, शौहरत, धन दौलत वक्शी आज उसी देश में रहकर असहिष्णुता पर बयान दे रहे है। देश की जनता को उनके बयान से भारी ठेस और दुख पहुंचा हैँ कुछेक दुर्घटनाओं के बिना पर एक देश को असहिष्णुता करार दे देना देश एवं देशवासियों का अपमान है।





