कवि लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें

मथुरा। गुरुशरणानन्द महाराज ने आह्नान किया कि कविगण अपनी रचनाओं के माध्यम से लोक कल्याण का मार्ग प्रयास्त करें। ब्रज चैरासी कोस यात्रा के ब्रज के ठाकुर दाऊदयाल की लीलाभूमि बलदेव पहुँचने पर आयोजित ब्रज भक्ति कवि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कवि शारदा पुत्र हैं और माँ सरस्वती के आशीर्वाद से उन्हें विद्या और वाणी का सशक्त वरदान प्राप्त है। इस वरदान से कवि और कविता को अमरत्व प्राप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि सच्ची कविता वही है जो समाज में सद्भाव बढ़ाये और भक्ति मार्ग से मुक्ति मार्ग की ओर प्रेरित करे। ब्रजभाशा के रससिद्ध कवि राधा गोविन्द पाठक की सरस्वती वन्दना ‘अंग स्वेताम्बरा - हस्त पुस्तक धरा उज्वला उज्वला शारदा  शारदा तथा ‘आओ रे सबकूँ बिरज भूमि बुलावै आओ रे आओ रे, थोड़े समय कूँ कृष्णमय है जाओ रे‘ से प्रारम्भ कवि सम्मेलन से कवि सोम ठाकुर की प्रस्तुति ‘ब्रजधाम महाअभिराम जहाँ घनस्याम से आनन्दरासी भए, किन पूरब पुन्य प्रतापन सौं ब्रज में जन्मे ब्रजवासी भए‘ को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सुना गया। कवि सम्मेलन में हास्य कवि देवेन्द्र दीक्षित ‘शूल‘ की कविता ‘ओ माखन प्रेमी नन्दलाल तुम मक्खन खाते थे हम स्वार्थ सिद्धि हेतु नित माखन लगाते हैं‘ ने भी श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।  संचालन कर रहे मोहन स्वरूप भाटिया ने अपनी लोकप्रिय रचना ‘खुरचन कढ़ाई वाली’ सुनाकर श्रोताओं की हास्य विभोर कर दिया।


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