नई दिल्ली । तीस लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग लागू होने का इंतजार है। वेतन आयोग की सिफारिशें वित्त मंत्रालय के पास हैं और बुधवार को अधिकार प्राप्त सचिवों की समिति ने वित्तमंत्रालय को इस आयोग की रिपोर्ट पर अपनी संस्तुति दे दी है।
बताया गया कि समिति ने वेतन आयोग द्वारा दी गई सिफारिशों से भी आगे बढ करीब 18-30 प्रतिशत वेतन वृद्धि की सिफारिश की है। जहां वेतन आयोग ने कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 18000 रूपये और अधिकतम सवा दो लाख रूपये (कैबिनेट सचिव और इस स्तर के अधिकारी के लिए ढाई लाख रूपये) की सिफारिश की थी वहीं, सचिवों की अधिकार प्राप्त इस समिति ने इसमें 18-30 प्रतिशत की वृद्धि की बात कही है।
यानी 18000 रूपये के स्थान पर करीब 27000 रूपये और सवा दो लाख के स्थान पर सवा तीन लाख रूपये करने की सिफारिश की है। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित वेतन आयोग ने रिपोर्ट वित्तमंत्रालय को सौंप दी थी और इसके बाद प्रक्रिया के अनुरूप कैबिनेट सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति ने वेतन आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद बुधवार को अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंपी है।
वित्तमंत्रालय अब इस पर कैबिनेट नोट तैयार करेगा। वित्त मंत्रालय एक हफ्ते में नोट तैयार कर लेगा और कैबिनेट की बैठक में इसे पेश किया जाएगा। इधर केंद्रीय कर्मचारियों की यूनियनों ने सरकार पर दबाव बनाना आरंभ कर दिया है। यूनियन संगठनों का कहना है कि सरकार यदि सातवां वेतन आयोग जल्द लागू नहीं करेगी तो वे जुलाई में हडताल पर चले जाएंगे।
याद रहे, छठा वेतन आयोग 1 जनवरी, 2006 से लागू हुआ था और उम्मीद है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू होंगी और कर्मचारियों को एरियर दिया जाएगा। आमतौर पर राज्यों द्वारा भी कुछ संशोधनों के साथ इन्हें अपनाया जाता है।
कहा जा रहा है कि नए वेतन ढांचे में सातवें वेतन आयोग ने छठे वेतन आयोग द्वारा शुरू की गई पे ग्रेड व्यवस्था खत्म कर इसे वेतन के ढांचे में शामिल कर दिया है और कर्मचारी का ओहदा अब ग्रेड पे की जगह नए ढांचे के वेतन से तय होगा। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि इस समिति की रिपोर्ट को वह पूरी तरह से लागू करेगी।
साभार-khaskhabar.com






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