गाड़ी विहिन सूचना विभाग कैसे करे सरकारी योजना का प्रचार-प्रसार

जिलाधिकारी का स्टाफ अपने निजि कामों मे कर रहा इस्तेमाल

मथुरा। जिला सूचना एंव जनसंम्पर्क विभाग के पास गाड़ी न होने के कारण प्रदेश सरकार की योजनाओं का प्रसार-प्रचार ठीक से नही हो पा रहा है। जिसकी मुख्य वजह सूचना विभाग के पास गाड़ी का नही होना  बताया जाता है। वाजेह हो कि मथुरा जिला सूचना विभाग के पास अपनी टाटा सूमों गाड़ी थी। पिछले दो साल से सूचना विभाग में सूचना अधिकारी की नियुक्ति नही होने के कारण विभाग की गाड़ी को एक पीसीएस अधिकारी ने अपने कब्जें में रखा। और अब पिछले कई मांह से जिलाधिकारी के स्टाफ द्वारा गाड़ी का इस्तमाल अपने रोजमरा और निजि कामों में कर रहा है। जिला सूचना विभाग में अब सूचना अधिकारी की नियुक्ति हुए बीस दिन हो गयें है। मगर सूचना विभाग को जिलाधिकारी का स्टाफ गाड़ी लोटाने को तैयार नही है। आखिर सूचना विभाग की गाड़ी को जिलाधिकारी का स्टाफ क्यों नही लोटाना चाहता है, क्या मथुरा जिलाधिकारी के पास गडि़यों की कमी है। जबकि पिछले मांह ही मथुरा में तैनात एक एसडीएम को एक ठेकेदार ने गाड़ी दी थी। एसडीएम के परिवार के लोग इस्तेमाल करतें थे। और एक दिन सादाबाद जिला हाथरस में पुलिस चैकिंग में गाडी में से हथियार समेत लोग पकड़े गयें थे। मामला एसडीएम से होने की बजह से उन्होने ये कहकर पिछा छुड़ा लिया था। कि मैनें गाड़ी ठेकेदार को लोटा दी थी। जिलाधिकारी के स्टाफ द्वारा जिला सूचना विभाग के डाइवर से भी वर्ताव ठीक नही किया जाता है। और जब गाड़ी खाराब हो जाती है। तो डाइवर से अपने रुपयों से गाड़ी ठीक कराने का दबाव डाला जाता है। पहले जिला सूचना अधिकारी न होने की वजह से विभाग के कर्मचारी खमोश थे। लेकिन अब सूचना अधिकारी की भी नियुक्ति हो जाने पर गाड़ी को विभाग को नही लोटाना की वजह से प्रदेश सरकार की योजनाओं का प्रसार-प्रसार ठीक से नही हो पा रहा है।


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