जंगल में मंगल: भक्ति – आध्यात्म के साथ
देश भर से हजारों भक्त: माधुर्य रसधारा
बाल कृष्ण की लीलास्थली पावन – पुरातन तीर्थस्थल रमण रेती स्थित ठाकुर रमण विहारी लाल मन्दिर प्रांगण में हजारों भक्त नर – नारियों की जय – जयकार से गूँजता पंडाल।
देश के विभिन्न राज्यों से पधारे जगद्गुरु रामनन्दाचार्य, रमेश भाई ओझा, स्वामी अवधेशानन्द, मलूक पीठाधीश्वर सन्त राजेन्द्र दास, स्वामी ज्ञानानन्द, महन्त नृत्यगोपाल दास, सन्त सुमेधानन्द, स्वामी अभिराम दास, भागवत प्रवक्ता स्वामी किशोरीरमणाचार्य आदि सन्त प्रवर एवं विद्वानों ने अपने सारगर्मित प्रवचनों में जीवन के यथार्थ का वर्णन करते हुए निष्काम कर्म, नर में नारायणा के दर्शन, निष्ठा एवं समर्पण भाव से ईश्वर के प्रति अनुरक्ति का आह्नान किया।

पंडाल के एक ओर विराजमान महामण्डलेश्वर काष्र्णि स्वामी गुरुशरणानन्द जी महाराज के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्ति हेतु प्रातः काल से ही भक्तजनों की पंक्तियाँ लगी रहीं। गोकुल से रमण रेती मार्ग पर पैदल चल रहे भक्तों एवं वाहनों की चहल – पहल तथा आश्रम के आसपास लगे बाजार तथा बीसियांे हजार भक्तों के लिए बसे तम्बुओं के उपनगर एवं प्रसाद स्थल से यहाँ अभूतपूर्व वातावरण छाया हुआ है। जयन्ती समारोह स्थल पर सुप्रसिद्ध नृत्यांगना स्वाति वांगनू के कथक नृत्य, ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति – संगीत कलाकारों की रसवृष्टि से भी सभी भक्तजन आादित हो रहे हैं।





