मथुरा। थाना सदर क्षेत्र के गांव औरंगाबाद में सट्टे का कारोबार जोरों पर हैं। जिससे बच्चों व छात्रों पर भी सट्टे का नशा चढ़ रहा है। चिड़ियां बल्ला के नाम से मशहूर इस खेल में 10 रुपए लगाने पर एक सौ रुपए पाने की लालच में जी-खोलकर जुआं खेला जा रहा है। लेकिन इलाका पुलिस का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। छात्रों को और छोटे-छोटे बच्चों को बर्बादी की ओर धकेल रहे इस धंधे पर रोक लगाने की किसी ने कोशिश नहीं की है।
ज्ञात रहे औरंगाबाद में गंगा मंदिर के निकट स्थित एक मकान में महेश चेटा द्वारा पर्चियों का यह खेल खिलाया जा रहा है। इसमें एक फ्लैक्स पर दस खाने बने हुए हैं, जिनमें चिड़ियां, बल्ला, फूल, कबूतर, पतंग, टाॅर्च जैसे चित्र बने हैं। इन पर दाब लगाने वाले को दस रुपए के बदले एक सौ रुपए देने का लालच दिया जाता है। दाब लगाने के बाद सट्टाधर संचालक द्वारा एक थैले में रखी पर्चियों में से एक पर्ची निकाली जाती है, यदि सट्टा लगाने वाले के चिन्ह वाली पर्ची निकलती है, तो उसे उसके द्वारा लगाई गई रकम का दस गुना दे दिया जाता है। यदि उससे अलग कोई चित्र निकलता है, तो सट्टा लगाने वाले की रकम गड्ढे में चली जाती है। जल्द ही पैसा कमाने के लालच में स्कूली छात्र और छोटे-छोटे बच्चे भी अपने जेब खर्च की रकम या फिर घर से चुराए गए रुपयों को यहां लगाने से नहीं चूकते। इससे लोगों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद भी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे बच्चों में सट्टा लगाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।





