जल नहीं होगा, तो कल नहीं होगा,
आज नहीं सोचा, तो हल नहीं होगा,- महेन्द्रनाथ चतुर्वेदी
जल नायक महेन्द्रनाथ चतुर्वेदी
मथुरा। ब्रज लाइफ लाइन वैलफेयर के संयोजक महेन्द्र नाथ चतुर्वेदी को आज अचानक मष्तिकाघात हो गया। उन्हें तत्काल स्थानीय निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। श्री चतुर्वेदी विगत कई वर्षो से मथुरा में शुद्ध पानी और यमुना को प्रदुषण मुक्त करने को निःस्वार्थ भाव से एक वृहद आन्दोलन छेड़े हुए है। आज श्री चतुर्वेदी संस्था के काम से ही कोतवाली रोड स्थित बैंक आफ बडौदा में 1 लाख रूपये का ड्राफ्ट बनवाने गये हुए थे। तभी अचानक उनकी तवियत बिगड़ गयी। जहां से उन्हें तत्काल निजी अस्पताल मंे भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत अब स्थिर बतायी जा रही है।
विदित हो कि श्री चतुर्वेदी को विगत 01 जनवरी को ब्रेन हेमरेज हो गया था। जिसके चलते उनके सीधी साइड में लकवा लग गया। आपको बताते चले महेन्द्र नाथ चतुर्वेदी को कई डॉक्टरो ने सलाह दी थी आप अपना इलाज करा लो पर उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। आज शहर के कोतवाली रोड स्थित बैंक आॅफ बड़ौदा की शाखा में वे एक लाख रूपये का ड्राफ्ट बनवा रहे थे तभी अचानक उन्हें मष्तिकाघात हुआ। उन्हे तत्काल पहले तो घर ले जाया गया। जहां घर में एक दम से भाग दौड़ मच गयी। आनन फानन में उन्हें ब्रज चिकित्सा संस्थान में भर्ती कराया गया लेकिन यहां चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिये। उसके बाद विपिन नर्सिग होम ले गये। जहाँ योग्य डॉ0 विपिन अग्रवाल ने उनको ठीक करने की जिम्मेदारी ले ली। श्री चतुर्वेदी शुद्ध पीने का पानी और यमुना नदी में शुद्ध जल के लिए लम्बे समय से संघर्षरत है। वो दिखावा नहीं जमीनी जंग लड़ रहे है। उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख 06 अप्रेल 2015 है।
जल नहीं होगा, तो कल नहीं होगा,
आज नहीं सोचा, तो हल नहीं होगा,
ये नारा श्री महेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने दिया है और जनपद के साथ साथ देश भर में प्रसारित किया है। आज उन्होंने एक मुलाकात के दौरान सब बताया हालाँकि अब उनकी तवियत में सुधार है। श्री यमुना सभी की आराध्य व आस्था का केंद्र है वो जल्द स्वस्थ होकर फिर से जल और श्री यमुना के लिये संघर्ष करने के लिये तैयारी कर रहे है। क्षेत्र के लोग उनके स्वस्थ्य के लियेे दुआये कर रहे है।
आखिर वो लड़की कौन थी?
बैंक में ड्राफ्ट बन चुका था मिल नहीं सका तभी श्री चतुर्वेदी की तवियत बिगड़ने लगी। बैंक के बाहर बेहोशी में लड़खड़ाते आये तो एक छोटी सी लड़की लाल फ्राक पहने हुए उम्र लगभग 8 या 9 वर्ष आकर उनका हाथ पकड़कर उन्हें घर की गली में दरबाजे तक आयी और उनसे कहा जा अब तेरा इलाज होगा और वो उसके बाद गायब हो गयी और फिर किसी को नहीं दिखी अब सवाल ये है कि वो कोई देवी रूप में आयी या साक्षात् श्रीयमुना जो उन्हें हाथ पकड़कर घर तक सुरक्षित छोड़ गयी। इस बात को लेकर शहर भर मेें तरह तरह की चर्चाऐं व्यप्त है।






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