
हिन्दी सेवी सोम ठाकुर , डा0 श्रीभगवान शर्मा , डा0 गोपाल बघेल का अभिनन्दन
गोवर्धन रोड स्थित ज्ञानदीप षिक्षा भारती सीनियर सैकेन्डरी स्कूल में 8 से 14 सितम्बर तक सप्ताह पर्यन्त चलने वाले विविध कार्यक्रमों का शुभारम्भ अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि तथा उŸार प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष सोम ठाकुर, टोरेन्टो ( कनाडा ) से आये विश्व हिन्दी समिति के अध्यक्ष डा0 गोपाल बघेल ’ मधु ’, विद्वान साहित्यकार डा0 श्रीभगवान शर्मा तथा ज्ञानदीप के सचिव मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में ज्ञानदीप के छात्र - छात्रा कु0 ज्योति चैधरी, कु0 सोनम पालीवाल, कु0 दीक्षा शर्मा, कु0 नेहा कुरैशी, कु0 अमीशा सारस्वत, कु0 सलोनी बंसल , कु0 निदा अतीक , कु0 तनु गौड़, कु0 सना परवीन, सुबोध चैधरी, हरिनाम शर्मा, अनुभव शर्मा , मोहित शर्मा तथा विवेक कौशल ने स्व रचित कविताओं का पाठ करते हुए तालियाँ बटोरीं।
ज्ञानदीप के सचिव मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा इस अवसर पर ’जय हिन्दी - जय राष्ट्र भाषा’ जय घोष के साथ आह्नान किया गया कि विद्यार्थी अपनी मातृभाषा जन - जन की भाषा हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें।
उन्होंने पीड़ा के साथ कहा कि संसार के किसी देश में उस देश की भाषा के नाम पर दिवस नहीं ’ मनाया जाता है, हमारे देश में हिन्दी दिवस नहीं हिन्दी समृद्धि दिवस’ मनाया जाना चाहिए।
कनाडा के हिन्दी सेवी डा0 गोपाल बघेल ने कहा कि संसार के सभी विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी हिन्दी का अध्ययन कर ज्ञानवर्धन कर रहें हैं। टोरेन्टो में वर्ष भर हिन्दी कवि सम्मेलन नाटक आदि के आयोजन होते रहते हैं जिनमें कनाडा वासी रुचिपूर्वक उपस्थित होते हैं।
सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार तथा 150 से अधिक पुस्तकों के लेखक डा0 श्री भगवान शर्मा ने कहा कि हिन्दी केवल भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है, भारत की अस्मिता है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा पद पर प्रतिष्ठित करने के लिए गुजराती भाषाभाषी महात्मा गाँधी , बंगला भाषाभाषी सुनील कुमार चाटुज्र्या राजगोपालाचार्या आदि अनेक अहिन्दी भाषाभाषियों ने प्रयास किया था।
सुप्रसिद्ध कवि सोम ठाकुर ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि हिन्दी ही एक मात्र ऐसी भाषा है जिसमें जो बोला जाता है वह लिखा जाता है, विश्व की किसी भाषा में यह विशेषता नहीं है। एक सर्वेक्षण में भी यह सिद्ध हुआ है कि कम्प्यूटर के लिए भी सबसे अधिक उपयुक्त देवनागरी लिपि है। आज सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि हिन्दी के प्रति उपेक्षा की वृŸिा छोड़ी जाय। उन्होंने छात्र - छात्राओं का काव्य रचना के सम्बन्ध में मार्ग दर्शन करते हुए कहा कि रचना बिम्बों के माध्यम से की जाय।
करते हैं तन - मन से वन्दन,
जन - गण - मन का अभिनन्दन।
अभिनन्दन अपनी संस्कृति का,
आवाहन अपनी भाषा का।
- सोम ठाकुर






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