
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के लिए मंजूरी दी गई। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम भारत को डिजिटल सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के बारे में 7 अगस्त को हुई प्रधानमंत्री की बैठक के दौरान इसके डिजाइन पर चर्चा हुई थी।
मोदी की इस बैठक के बाद डिजिटल इंडिया कार्यक्रम सरकार के सभी मंत्रालयों को देश के हर कोने से जोड़ने का एक कारगर प्रयास है। यह कार्यक्रम इलेक्ट्रोनिक्स और प्रौद्योगिकी विभाग की परिकल्पना है। डिजिटल इंडिया के विजन का उद्देश्य देश को डिजिटल सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करना है। यह कार्यक्रम चालू वर्ष से 2018 तक चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाएगा। डिजिटल इंडिया की प्रकृति रूपांतरकारी है तथा इससे सुनिश्चित होगा कि सरकारी सेवाएं नागरिकों को इलेक्ट्रानिक रूप से उपलब्ध हों। यह सरकार की सेवाओं को इलेक्ट्रानिक रूप से प्रदान करने के जरिए सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ाएगा। (Read in English: Digital India – Digital Empowered Society And Knowledge Economy)
फिलहाल अधिकतर ई-गवर्नेन्स परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहायता केंद्र या राज्य सरकारों में संबंधित मंत्रालयों/विभागों के बजटीय प्रावधानों के जरिए होती है। डिजिटल इंडिया के लिए अलग-अलग परियोजनाओं के लिए फंड की जरूरत का अनुमान संबंधित नोडल मंत्रालय/विभाग लगाएंगे।
डिजिटल इंडिया के विजन क्षेत्रों को इस प्रकार से बांटा गया है कि इससे प्रत्येक नागरिक के लिए सुविधा के रूप में बुनियादी ढांचा, मुख्य सुविधा के रूप में हाई स्पीड इंटरनेट सभी ग्राम पंचायतों में उपलब्ध कराया जाएगा। अनोखी, आजीवन, ऑनलाइन और प्रमाणन योग्य डिजिटल पहचान, मोबाइल फोन और बैंक एकाउंट व्यक्तिगत स्तर पर डिजिटल और वित्तीय रूप में भागीदारी में समर्थ बनाएंगे। स्थानीय स्तर पर सामान्य सेवा केंद्र तक आसान पहुंच, पब्लिक क्लाउड में साझा करने योग्य निजी स्थान, देश में सुरक्षित साइबर स्पेस
गवर्नेन्स और मांग पर सेवाएं देना भी इसका एक कारगर पहलु है। जिससे देश के सभी लोगों को आसान एवं सिंगल विंडो एक्सेस उपलब्ध कराने के लिए विभागों या अधिकार क्षेत्रों तक निर्बाध समेकन, ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफार्म से रीयल टाइम में सरकारी सेवाएं उपलब्ध, सुगम एक्सेस सुनिश्चित करने के लिए सभी नागरिकों को क्लाउड पर उपलब्ध कराने का हक, इलेक्ट्रानिक और कैशलेस वित्तीय लेनदेन करने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम दे के नागरिकों के सशक्तिकरण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सबको डिजिटल साक्षर बनाना, सभी डिजिटल संसाधन सबको सुगम-सुलभ कराना, सभी सरकारी कागजात/प्रमाणपत्र क्लाउड पर उपलब्ध कराए जाएंगे, भारतीय भाषाओं में डिजिटल संसाधन/सेवाओं की उपलब्धता, डिजिटल इंडिया का कार्यक्षेत्र, भारत को ज्ञान भविष्य के लिए तैयार करना, बदलाव के लिए प्रौद्योगिकी को केंद्रीय स्तर पर रखा जायेगा।
डिजिटल इंडिया का उद्देश्य वृद्धि के नौ प्रमुख स्तंभों पर आवश्यक ध्यान देना भी है। जिसमें ब्राडबैंड हाइवेज, मोबाइल कनेक्टिविटी सबको सुगम-सुलभ कराना, पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम, ई-गवर्नेन्स: प्रौद्योगिकी के जरिए सरकार को सुधारना, ई-क्रांति - सेवाओं की इलेक्ट्रानिक डिलीवरी, सबके लिए जानकारी, इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण, रोजगारों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी, अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम्स आदि।
मोदी सरकार जब से सत्ता में आयी है तभी से सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों को इन्टरनेट से जोड़ने की बात चल रही थी। डिजिटल इंडिया के नाम से चालू हो रहे इस कार्यक्रम के माध्यम से भविष्य में इसका लाभ सभी भारतीयों मिलेगा। इस कार्यक्रम के क्रिन्यान्वयन के बाद उन लोगों को अधिक लाभ होगा जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से घबराते है या उनके पास इन दफ्तरों के आगे-पीछे घुमने के लिए समय की भी कमी है। इसके साथ ही समाज के उन लोगों को भी लाभ होगा जिनको सरकारी दफ्तरों में काम करवाने के लिए वहां के कर्मचारियों को रिश्वत देने पड़ते है। इस कार्यक्रम की आधारशिला ही इसलिए रखी गयी है जिसके इससे सरकारी दफ्तरों में पैसे की उगाही और समय की बर्बादी दोनों को रोका जा सके।






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