नई दिल्ली। तेजस लड़ाकू विमान का पहला स्क्वाड्रन इस साल दिवाली से पहले उड़ान भरेगा। यह भारतीय वायु सेना के बेड़े के लिए लड़ाकू विमानों की स्वीकृत संख्या के निकट पहुंचने की ओर एक कदम होगा। यह बात रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कही। आकाशवाणी के साथ साक्षात्कार में रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि अगले पांच साल में रक्षा क्षेत्र के आयात में 30 से 35 प्रतिशत की कमी होगी। पर्रिकर ने कहा, ‘‘भारतीय वायु सेना में 1994 से कोई नया लड़ाकू विमान शामिल नहीं किया गया है। विगत 32 वर्षों से तेजस अटका हुआ था। अब दो विमानों की आपूर्ति की गई है और अगले दो महीने में कुछ और तेजस की आपूर्ति की जाएगी।’’ मंत्री ने कहा कि सितम्बर-अक्तूबर तक तेजस का पहला स्क्वाड्रन तैयार हो जाएगा और यह दिवाली से पहले उड़ान भरेगा।
वायु सेना में लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की संख्या में कमी पर पर्रिकर ने कहा कि यह कमियां शीघ्र पूरी हो जाएंगी। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘लड़ाकू विमानों के स्वीकृत स्क्वाड्रन की संख्या 42 है, लेकिन शत प्रतिशत कभी हासिल नहीं हुआ है। अगले तीन से चार वर्षों में तेजस के चार से पांच स्क्वाड्रन वायु सेना में शामिल किए जाएंगे। साथ ही सुखोई के भी कुछ और स्क्वाड्रन आ जाएंगे। तब तक राफेल के भी दो स्क्वाड्रन आ जाएंगे।’’
बहुभूमिका वाले लड़ाकू जेट विमान के देश में उत्पादन के सवाल पर पर्रिकर ने कहा, ‘‘इस साल के अंत तक यह निर्णय कर लिया जाएगा कि किस लड़ाकू विमान का उत्पादन देश में होगा। हमने अभी तक यह तय नहीं किया है कि हम एफ-18, यूरोफाइटर, राफेल या ग्रिफ्फिन में कौन सा बनाएंगे।’’ रक्षा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने और आयात कम करने के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा उपकरणों के आयात में 30 से 35 प्रतिशत की कमी करना अच्छा आंकड़ा है जबकि कुछ चीजों के आयात सस्ते हो सकते हैं। पर्रिकर ने कहा कि सैन्य उपकरणों का आयात 70 से घट कर 63 प्रतिशत हो गया है।
साभार-khaskhabar.com






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