देवोत्थान एकादशी पर तीन वन की परिक्रमा लगाते श्रद्धालु
मथुरा। आज देवोत्थान एकादशी के पर्व पर ब्रज के तीनों वन की परिक्रमा बीती रात्रि से ही शुरू हो गयी। तीनों वन की यह परिक्रमा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लगभग 54 किमी लंबी इस परिक्रमा को देने के लिये श्रद्धालुआंे में भारी उत्साह और आकर्षण रहता है। देर रात्रि से ही इसका क्रम शुरू हो गया। मथुरा, वृन्दावन और गरूण गोविंद क्षेत्र इस परिक्रमा में तीनों वन के रूप में माने जाते हैं। देवोत्थान एकादशी पर्व पर आज भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने यमुना के घाटों पर स्नान और व्रत लकर इस लंबी परिक्रमा को शुरू किया। नगर पालिका और प्रशासन द्वारा इसके लिये रोशनी के पर्याप्त इंतजाम किये गये। सफाई व्यवस्था भी की गयी ताकि श्रद्धालुओं को परिक्रमा मार्ग में कठिनाई न हो। तीनों वन की इस परिक्रमा में ज्यादातर बड़े लोगों द्वारा इसे संपन्न किया जाता है। काफी कठिन और लंबे रास्ते के चलते परिक्रमार्थी बुरी तरह थक जाते हैं। आज देवोत्थान एकादशी पर मथुरा की पंचकोसीय परिक्रमा भी लगाई जाती है। इसे अलग-अलग रूप में धार्मिक लोगों ने वर्णित किया है।
कुछ लोग कंस वध के बाद विजय स्वरूप इस परिक्रमा को करते हैं जबकि धार्मिक मान्यता में यह भी कहा गया है कि देवों के उठने के साथ ही सभी ब्रजवासी उनकी परिक्रमा के लिये भोर से ही निकल पड़ते हैं और श्रद्धाभाव के साथ अपने देवताओं का नमन कर उनसे प्राणी मात्र में सदभाव और प्रेम की मनौती मानते हैं। देवोत्थान एकादशी पर्व पर आज श्रद्धालुओं की परिक्रमा मार्ग में लंबी लाइनें देखने को मिलीं। दान-पुण्य और संकल्प लेकर लोगों ने इसे शुरू किया।





