
महरौली में प्रधान ने जेसीबी और ट्रैक्टर से खुदवायी मनरेगा की पोखर
गांव महरौली की पोखर में खुदाई करती जेसीबी और मिटटी हटाता ट्रैक्टर साथ लाल घेरे में खड़े है प्रधान के भाई राम सरन बघेल दूसरे चित्र में बीच पोखर में खुदाई करती जेसीबी
गोवर्धन। केन्द्र सरकार द्वारा गरीब ग्रामीणों के हित के लिये लागू की गयी मनरेगा योजना के प्रदेश में बदतर हालात है। सरकार और गांवों के जन प्रतिनिधि मिलकर केन्द्र की इस योजना को जमकर पलीता लगाने में जुटे है। विगत दिनों विकास खण्ड गोवर्धन के गांव महरौली में पाया गया कि ग्राम प्रधान द्वारा गांव में मनरेगा से कराये जाने वाले कार्य ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों से पूर्ण कराकर गरीब मनरेगा के मजदूरों के पेट लतियाए जा रहे है। पूर्व में भी ग्राम प्रधान द्वारा मनरेगा योजना में व्यापक स्तर पर धांधलियां करने के आरोप प्रकाश में आते रहे थे। लेकिन विगत रोज गांव पहुंची हमारी टीम ने मनरेगा के कार्य जेसीबी और ट्रैक्टर द्वारा होता आरोपोें की हकीकत को अपने कैमरे में कैद कर लिया। इस करतूत के विषय में जब ग्राम प्रधान पूरन सिंह बघेल से फोन पर वार्ता की गयी तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए इसे अवैध तो बताया लेकिन अपने भाई की मौजूदगी पर चुप्पी साध ली। वहीं ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर मनरेगा में व्यापक स्तर पर घलमेल किये जाने का आरोेप भी लगाया है।
विदित हो केन्द्रीय सरकार ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और मजदूर लोगों के लिये रोजगार सुनिश्चित करने हेतु मनरेगा जैसी महती योजना चलायी है। जो अपनी विशेषताओं के चलते विश्व समुदाय में प्रासंगिक बन गयी है और ग्रामीण मजदूरांे व गरीबो के लिये किसी जीवन दायिनी से कम साबित नहीं हो रही है।
चंूकि योजना का क्रियान्वन प्रदेश सरकारों द्वारा किया जा रहा है और केन्द्र से प्रदेश सरकार के कभी भी बेहतर तालमेल नहीं बैठ पाये है बल्कि मतभेद ही रहे है। प्रदेश सरकार भी इस योजना के क्रियान्वयन में कोई खास रूचि नहीं ले रही है। जिससे गरीबों की ये योजना हर ग्राम पंचायत में सत्ता और राजनीति के चन्द ठेकेदारों तक सिमट कर रह गयी है। इसीलिये इस योजना के वास्तविक लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं ग्राम पंचायतांे के प्रधान अपने निजी स्वार्थो की खातिर गरीब मजदूरों के हितों पर डाका डालने में जुटे हुए है। इस केन्द्रीय योजना के अन्तर्गत ग्राम पंचायतों में गरीब मजदूरों 100 दिन का रोजगार दिलाने का वायदा किया गया है। जिसके तहत ग्रामीण मजदूरों को ग्राम पंचायत के होने वाले विकास कार्यों को सम्पादित करना होता है। लेकिन महरौली गांव पंचायत में इस योजना की जमकर धज्जियां उड़ायी जाती देखी गयी। गांव में ग्राम पंचायत द्वारा गांव के वे विकास कार्य जो मनरेगा के मजदूरों द्वारा उन्हें रोजगार उपलब्ध कराते हुए उन्ही से कराये जाने थे वे कार्य जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टरों से सम्पादित कराकर मजूदरों के हक पर डाका डाला जा रहा है। पिछले काफी लम्बे समय से इसकी काफी शिकायतें भी मिल रही थी। इन शिकायतों पर विगत दिनों गांव महरौली पहुंची हिन्दुस्तान एक्सप्रेस की टीम ने गांव पहुंचने पर इसकी हकीकत अपनी आंखों से देखी और कैमरे में कैद कर ली। ग्राम पंचायत के अन्तर्गत आने वाले जिस तालाब की मनरेगा के मजदूरों के द्वारा खुदाई करायी जानी थी उसके खुदाई कार्य में ग्राम प्रधान के भाई रामसरन बघेल के निर्देशन में जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर द्वारा खुदाई करायी जा रही थी। जब रामसरन बघेल से इस कार्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के कार्यो के तहत तालाब के किनारों के गडढ़े भरवाने के लिये इस तालाब से मिटटी की खुदाई कराकर गडढे भरे जा रहे है। वहीं जब ग्राम प्रधान पूरन सिंह बघेल से इस खुदाई कार्य के बारे में पूछा गया तो उन्होने से इस तरह के जेसीबी और ट्रैक्टर द्वारा तालाब में कराये जा रहे कार्य को पूरी तरह से अवैध बताते हुए इस से पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की। वहीं ग्रामीणांे ने इस मौके पर हमारी टीम के सदस्यों को ग्राम प्रधान द्वारा गांव के विकास में बरती जा रही अनेकों अनियमितताओं की शिकायतों की झड़ी लगा दी जिससे साफ प्रतीत हो रहा था कि प्रधान बनने के बाद से ही ग्राम प्रधान पूरन सिंह बघेल द्वारा गांव में व्यापक स्तर पर अनियमितताऐं और घाल मेले किये गये हैै। खैर इन शिकायतों को सच माने या न माने लेकिन गांव में मनरेगा मजदूरों के स्थान पर पोखर में चल रही जेसीबी और ट्रैक्टर की उपरोक्त तस्वीर प्रधान की करतूतों की हकीकत उजागर कर पाने मे पूरी तरह सक्षम रही है। अब देखना ये है कि मनरेगा की इस दुर्दशा को देखकर अधिकारी वर्ग इस ओर क्या कदम उठायेगा या सिर्फ ये मामला भी यूं ही फाइलों में ही दबा रह जायेगा।






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