मथुरा। राष्ट्रीय लोकदल में पनप रही धड़ेबाजी से संगठन कमजोर हो गया है। जिलाध्यक्ष के पास कोई विचार, नीति और कार्यक्रम नहीं हैं। वहीं वे संगठन को एकजुट करने में अभी तक असफल ही साबित रहे हैं। यही कारण है कि रालोद की धड़ेबंदी रूकने का नाम नहीं ले रही है। पहले रालोद के धरने प्रदर्शनों के चलते भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ता था लेकिन वर्तमान में गुटों में बंटी रालोद की शक्ति क्षीर्ण हो रही है। अलग-अलग नेता, अलग नेता राग अलाप रहे हैं। जब से जयंत चैधरी चुनाव हारे हैं, जनपद की लोकदल में धड़ेबंदी तेजी से पनप रही है। जिला पंचायत के चुनाव को लेकर धडे़बंदी पार्टी को नुकसान पंहुचा सकती है। जयंत चैधरी तो जिले में नहीं रहते लेकिन नेता उनके जैसे कान भर देते हैं वैसे ही निर्देश मिलते हैं। इस सब से पार्टी का कार्यकर्ता दुखी है। प्रदेश में लोकदल वैसे ही खराब स्थिति में है। ऐसे मंे जनपद में धड़ेबाजी पार्टी को नुकसान पंहुचायेगी। लोकदल के बड़े नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिये।
प्रदर्शन के बाद सौंपा ज्ञापन
मथुरा। काफी लंबे समय से राष्ट्रीय लोकदल किसानों की समस्याओं को लेकर आये दिन धरना-प्रदर्शन कर रहा है लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब फिर जिलाध्यक्ष की अगुवाई में आज लोकदल के लोगों ने प्रदर्शन और राज्यपाल को जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। वही पुरानी मांगें, प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था सुधारें, भ्रष्टाचार को दूर करें, सरकारी नौकरी में अनियमितता रोककर सभी आयोग के अध्यक्षों को बर्खास्त करें और सीबीआई की जांच करायें और इन्हें दण्डित करें, यादव सिंह को संरक्षण देने वालों की गिरफ्तारी और कार्यवाही हो, ओलावृष्टि पीड़ित किसानों की मदद, जिले की खस्ताहाल सड़क बनवायें आदि को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर विधायक पूरन प्रकाश, जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सिकरवार, नरेन्द्र सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह, राकेश जाटव, सोहन लाल वाल्मीकि, भूपेन्द्र सिंह, महावीर सिंह, जयवीर सिंह, हरवीर चैधरी आदि मौजूद थे।





