नववर्ष के प्रथम दिन जयगुरूदेव संस्था के संस्थाध्यक्ष पंकज बाबा महाराज जयगुरूदेव अनुयायियों को प्रेम व सौहार्द का संदेश देते हुए
मथुरा। नव वर्ष के प्रथम दिन जयगुरुदेव आश्रम भी हर्षोल्लास व नवीन भक्ति भावों के साथ प्रेम व सौहार्द के संगम का पर्याय बन गया। संस्थाध्यक्ष पंकज महाराज ने अपने गुरु महाराज से इसे भूल-भरम और अज्ञान की दुनियां मंे सभी जीवों पर दया करने की प्रार्थना की और कहा कि प्रभू की दया सब पर बनी रहे। सारे संसार में प्रेम-सौहार्द, दया, अहिंसा और सद्भाव का वातावरण बने। सभी लोग मानव धर्म, शाकाहार कर्म अपनायें और आत्मधन पाने के लिये निरन्तर एवं नियमित साधन भजन करने का बृत लें। जीवन में चरित्र-निर्माण और अच्छे समाज की रचना का महान् परोपकारी लक्ष्य बनायंे जिससे समाज का नव-निर्माण, सुधार हो और भंयकर विभीषिका से बचत हो। देश के कोने-कोने से आये श्रद्धालुओं को नव वर्ष का सन्देष देते हुये संस्था प्रमुख पंकज महाराज ने कहा कि हमारी अभिलाषायें जीवन में सुख और शान्ति के लिये भटकती हैं, यह भूल-भरम और अज्ञान का देश है। यहाँ क्षणिक सुख भी अन्ततः दुःखदाई होता है। सुख और दुःख का मिला-जुला जीवन संसार की नश्वरता और असारता का सन्देश देता है। इस दुःखदाई शंसय के सागर ‘संसार’ को समझबूझकर असली सुख-शान्ति की खोज करनी चाहिये। कहा कि गुरु का, मालिक का भरोसा रखो, उसको पाने के लिये दो बूंद आंसू गिराओ। जब तक दिल में तड़प-विरह की वेदना नहीं होगी, हम कभी भी मालिक को प्राप्त नहीं कर सकते। दया का घाट अन्दर है। उस घाट पर हाजिरी देते रहना साधक का स्वभाव है। निशाना गुरु की तरफ रखो। इधर-उधर नहीं। समय का इन्तजार करिये। सबने समय का इन्तजार किया। शाकाहार का प्रचार बराबर करते रहियेगा। इसी से दुनियां में भारी परिवर्तन होगा।





