कार्यक्रम का दीपप्रज्जवलित करते उप्र के चर्चित प्रमुख सचिव सूर्यप्रताप सिंह
मथुरा। ‘‘आज नौकरशाही खादी की गुलाम हो गयी है जिससे जनता को न्याय के लिये नेताओं की चैखटों पर जाने पर मजबूर होना पड़ता है । जहाॅं जनता की नहीं राजनीतिक परिवारों की आवाज को सुना जाता है ।’’ उक्त विचार विषबाण साप्ताहिक परिवार के तृतीय स्थापना दिवस पर आयोजित सहिष्णुताः लोक, तन्त्र एवं राजनीति, विषय पर बोद्धिक विमर्श में उत्तर प्रदेश के चर्चित प्रमुख सचिव सूर्यप्रताप सिंह ने व्यक्त किये । प्रमुख सचिव ने राजनैतिक पार्टियों पर प्रहार करते हुये कहा कि वोटों की राजनीति के चलते कोई भी दल अपने वायदों को नहीं निभाता है । पिछले 68 सालों में यूपी की जनता को कुछ नहीं मिला । वीजेपी, बसपा और सपा सरकार बनने पर आरक्षण को लेकर किये अपने वायदों को ठण्डे बस्ते में डाल देती है । प्रदेश में सरकारी नौकरी में जाति विशेष की भर्ती को लेकर उन्होंने कहा कि 27 में 21 प्रतिशत तो यादव जाति को लिया गया है वहीं 6 प्रतिशत अन्य 233 जाति के लोगों को भर्ती किया । उन्होने ‘नेता लोगों कुर्सी छोड़ो, जनता आती है’’ नारा देते हुये कहा कि देश में परिवर्तन लाने के लिये जनता को सत्ता अपने हाथ में लेनी होगी । वह मुख्यमंत्री बनने नहीं बनाने के लिये निकले हैं। श्रीसिंह ने बुन्देलखण्ड पर बोलते हुये कहा कि 57 प्रतिशत लोग भुखमरी के शिकार हैं वहीं प्रदेश के नेता महोत्सव में मग्न हैं । उन्होंने कहा कि भारत में जातियों को तोड़ नहीं सकते लेकिन जातियों का राजनैतिक रूप से प्रयोग गलत है ।
दिल्ली से आये इण्डिया संवाद के कार्यकारी सम्पादक अरूण कुमार त्रिपाठी ने देश में असहिष्णुता की वृद्धि से सहमति जताते हुये कहा कि अब लोगों में अपनी आलोचना सुनने का धैर्य नहीं रह गया है। इससे पूर्व प्रमुख साहित्यकार मोहनस्वरूप भाटिया, भारतीय व्यापार मण्डल के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रविकान्त गर्ग, प्रमुख समाजसेवी गजेन्द्र शर्मा, कोसी नगरपालिकाध्यक्ष भगवत प्रसाद रूहेला ने कहा कि असहिष्णुता के नाम पर देश का माहौल खराब किया जा रहा है। जिस देश में बच्चों को चीटीं को भी मारने से रोका जाता हो वहाॅं इस तरह की बाते व्यवहारिक नहीं कही जा सकती।





