अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग पर अलाप रहे नेता और सरकार
फरह। एकात्म मानववाद के प्रणेता की धारा पर जन्म शताब्दी मनाने का विवाद गहरा रहा है। संघ चिंतन कर रहा है कि इस दिशा में क्या किया जाए। लेकिन संघ और भाजपा को एक मानने वालों का इस विचार पर मिथक टूट रहा है। रविवार को दीनदयाल की जन्म भूमि पर स्मारक समिति की ओर से एक बैठक भी आयोजित की गई। इसमें ज्यादातर संघ से जुडे लोगों ने शिरकत की थी। हालांकि भाजपा कार्यकर्ता भी इस बैठक में पधारे थे। चर्चा भी हुई। लेकिन पूरी स्मारक समिति और मेला समिति सरकार के निर्णय से अलग दिखी। अपने फैसले पर कायम रही। समिति जन्मशताब्दी अगले साल मनाएगी। बात तारीख की नहीं है। केन्द्र सरकार इसी साल 25 सितम्बर को नगला चन्द्रभान में पं दीनदयाल की जन्म शताब्दी मनाने जा रही है,। समिति अगले साल यह कार्यक्रम करेगी। ऐसा क्यों! बीते दिन हुई बैठक का एकमात्र लक्ष्य आगामी 10 अक्टूबर रहा। जन्म शताब्दी पर चर्चा करना भी गंवारा नहीं समझा। सभी लोगों को 9 से 11 अक्टूबर तक लगने वाले त्रिदिवसीय महोत्सव की जिम्मेदारियां सौंपी। 25 सितम्बर को इसी स्थान पर जहां हर साल त्रिदिवसीय महोत्सव आयोजित होता है, क्या होने वाला है। किसी भी सदस्य को नहीं पता था। गांव के पूर्व प्रधान ने जरूर सवाल उछाला कि विश्वस्तसूत्रों से ज्ञात हुआ है कि 25 सितम्बर को इस धरा पर कोई कार्यकम होने जा रहा है। स्मारक समिति और महोत्सव समिति के पदाधिकारी पूर्व प्रधान का मुंह देखने लग गए। मानो उनको कोई जानकारी नहीं हो। सभी ने खामोशी ओढ ली। दीन दयाल स्मारक के निदेशक पदम सिंह ने तत्पश्चात इस विषय पर थोडा बहुत बताया कि युवा मामलों के मंत्रालय से टीम आई थी। पत्रक भी आया है। पूरे देश के सौ गांव से कुल बीस हजार लोग यहां आएंगे। पहले दस हजार लोगों के आने की संभावना है। भारत सरकार 25 सितम्बर को धूमधाम से धरा पर जन्मशताब्दी महोत्सव मनाएगी। इधर सरकार भी स्मारक समिति से जुडे पदाधिकारियों को कोई तवज्जो नहीं दे रही है। इस सिलसिले में सरकार ने यहां के पदाधिकारियों से कोई राय भी नहीं ली है न मशविरा लिया है। सरकार अपने बूते पर ही कार्यक्रम आयोजित करेगी। कौन से मंत्रियों के आने की संभावना है, यह भी इनको नहीं बताया गया है।





