मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम पर चल रहे वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला में आज चैथे दिन पंकज महाराज ने कहा कि प्रभु की पूजा करने का सबको समान अधिकार है। मनुष्य के खोटे कर्म महात्माओं की तरफ नहीं जाने देते हैं। सन्त महापुरुष तो सभी जीवों को भव सागर से निकालना चाहते हैं लेकिन कोई भी जीव उनकी बात मानने के लिए तैयार नहीं होते हैं। मालिक सबके अन्दर हैं, उसके मिलने का रास्ता भी सबके अन्दर में है, नामधुन आ रही है। उस परमात्मा ने शरीर के अन्दर कोई कमी नहीं रखी है। अबकी बार मानव तन मिला है। इसको व्यर्थ चीजों में नहीं गवाना चाहिये। इसलिये सुमिरन, भजन, ध्यान नित्य नियम से लगन के साथ करना चाहिये। यदि इसमें एक दिन का नागा होता है, तो महीनांे पीछे हो जाते हैं। मन ने अपनी हविश को पूरा करने के लिये जाति-पाति, सम्प्रदाय, मजहब आदि बन्दर बांट किया है। जीव की मौत किसी न किसी बीमारी के बहाने होता है। पांचो तत्व शरीर से निकल जने को मौत कहते हैं। इसमें जीव को महान कष्ट होता है। कष्ट के कारण आंखों से आंसू गिरते हैं और किसी-किसी को मल-मूत्र भी हो जाता है। इसीलिये कष्ट से बचने के लिये सत्गुरु की शरण और भजन जरूरी है। श्रद्धालु भण्डारे का पूजन प्रसाद लेकर अपने घरों को वापस जाने लगे हैं। मेले में दर्जनों जोड़े दहेज रहित विवाह कार्यक्रम सम्पन्न हुये। बाबा जयगुरुदेव महाराज की निर्माणाधीन समाधि मंे बढ़-चढ़ कर भाग लेने का संकल्प श्रद्धालुओं ने लिया।





