दोनो अस्पतालों में फिर हुआ दलालों की जमावडा़
मथुरा। जनपद के महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात बालक की मौत होने पर परिजनों ने चिकित्सकों की लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा काटा हंगामें की सूचना मिलतें ही नगर मजिस्ट्रेट डा0 राजेश प्रजापति व क्षेत्राधिकारी नगर अनिल यादव शहर कोतवाली कुंवर सिंह यादव मय फोर्स के घटना स्थल पर पहुंच गये। जिन्होंने हंगामा कर रहें लोगों को समझा बुझाकर शान्त किया व आरोपी वार्ड वाय व प्राइवेट नर्स के विरूद्व जाॅच कर कार्यवाही का आश्वासन के वाद मामला शान्त हो सका।
मिली जानकारी के अनुसार सोनू पुत्र अमरपाल निवासी अर्जुनपुरा डीगगेट थाना गोबिन्द की पत्नी पिंकी को विगत रात्रि जिला महिला अस्पताल में प्रसव पीढ़ा होने पर भर्ती कराया गया। जिसमें आज दोपहर 1 बजे पिंकेी ने एक बालक को जन्म दिया लेकिन थोड़ी ही देर बाद बालक की तवियत विगड़ी और नवजात शिशु की मौत हो गई। वालक की अचानक मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। और सोनू ने अपने अन्य साथियों को फोन कर अस्पताल में बुला लिया और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलतें ही नगर मजिस्टेंªेट डा0 राजेश प्रजापति व नगर क्षेत्राधिकारी अनिल यादव, शहर कोतवाल प्रभारी कुंवर सिंह यादव मय फेार्स के घटना स्थल पर पहुंच गये। पीडि़त सोनू ने अधिकारियों को बताया कि रात को ही अस्पताल में प्राइेवेट नर्स व वार्ड वाय नन्दू पुत्र राधेश्याम ने उनसे अवैध धन की माॅग की लेकिन उन्होंने धनराशि देने से मना कर दिया इससे से कुपित होकर चिकित्सकों व अस्पताल स्टाफ ने प्रसव के दौरान लापरवाही बरती और उसके बालक की मौत हो गई। अधिकारियों ने पूरे मामलें को गंभीरता से लिया और आरोपी प्राइवेट नर्स व वार्ड वाय के खिलाफ जाॅच केर कार्यवाही की आश्वासन दिया। तब जाकर मामला शान्त हो सका। लोगों का कहना है कि जिला अस्पतासल व महिला अस्पताल दोनो में मरीजों से अवैध धनराशि की माॅग की जाति है और जो लोग धनराशि मुहैया करीया देते है उनका ईलाज तो ठीक प्रकार कर दिया जाता है और जो लोग अवैध धनराशि नहीं देते उनके मरीज की अस्पताल स्टाफ बेकदरी करते है जिसके परिणाम स्वरूप कुछ मरीज तो बिना ईलाज के वापस चले जाते है वहीं कुछ मरीज आर्थिक तंगी के चलते अपने मरीज को वहीं रखते है जिससें कुछ मरीजों की तो इलाज व अवैध धनराशि के अभाव में मौत तक हो जाती हैं। लोगों का कहना था कि नवागत जिलाधिकारी ने शुरू शुरू में तो अस्पताल पर तावड़ तोड़ छापामार कार्यवाही की लेकिन कुछ दिन अस्पताल का माहौल सहींे रही लेकिन दोनो अस्पताल अब वहीं पुराने ढर्रे पर आ गये हैं। लोगों ने जिलाधिकारी से पुनः जिला अस्पताल व महिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने का अनुरोध किया है जिससें गरीब व मजदूर लोगों को ईलाज निःशुल्क मिल सकें और दलालों की सफाया हो सके।





