बाहरी प्रत्याशी के नाम पर मुंह सिकोड़ते हैं लोग

Sunil Sharma लोकसभा चुनाव 2014 की सभी तैयारियां हो चुकीं हैं शासन प्रशासन ने कमर कसली है समय अब ज्यादा बचा नहीं है। लेकिन अभी भी कुछ पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। जो पार्टियां पाँच साल में यह निर्णय नहीं कर पायीं कि जनपद से किसे पार्टी का प्रत्याशी बनाया जाय। इस प्रकार की पार्टियां देश को और जनपद को क्या विकास दे पायेंगी।

कांग्रेस तो अपना हमजोली रालोद को बनाकर संयुक्त प्रत्याशी के तोर पर सांसद जयन्त चैधरी की घोषणा कर चुकी है। वहीं समाजवादी पार्टी तो चुनावों से पूर्व लम्बे समय से अपने प्रत्याशी चन्दन सिंह जो कि ठाकुर प्रत्याशी होने के साथ साथ दो वार अलग अलग क्षेत्रों से विधायक रहे को चुनाव लड़ाने की घोषणा कर चुकी है।

बसपा ने भी अपना प्रत्याशी योगेश द्विवेदी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। जो वृन्दावन की पूर्व चेयरमैन बसपा नेत्री पुष्पा शर्मा का पुत्र तथा वर्तमान में मथुरा के ब्लाक प्रमुख के भाई भी हैं। लेकिन अभी तक भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। हालही में आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने मथुरा के नौहझील में आकर एक बड़ी सभा के माध्यम से क्षेत्र के किसान नेता श्री रामबाबू कठेलिया (जाट) को सदस्यता दिला कर संकेत कर दिया है कि आम आदमी पार्टी भी जयन्त चैधरी के सामने जाट पर दाव लगायेगी।

लेकिन उपर से लेकर नीचे तक निष्क्रियता की शिकार भारतीय जनता पार्टी मोदी मिशन के सहारे कैसे केन्द्र तक पहुँच पायेगी यह गूंढ प्रश्न है।

यहां की जनता का मानना है कि किसी बाहरी प्रत्याशी को हम बरदास्त नही करेंगे उनका कहना है कि पार्टी की ओर से कभी हेमा मालिनी कभी सन्नी देओल व कभी फिल्म अभिनेता और रामायण सीरियल के ‘‘राम’’ अरूण गोबिल को भी मथुरा से उतारना चाहती है।

आजकल इनके नामों की चर्चा हो रही है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार हेमामालिनी जो खुद ब्राहम्ण है तथा उनके पतिदेव फिल्म अभिनेता धमेन्द्र जाट होने के कारण इसी गणित को लगाकर पार्टी उन्हें यहां से चुनाव मैदान में उतारना चाहती है।

पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के अनुसार यह क्या पार्टी के लिये हितकर होगा। इनके सहारे भींड़ को तो इक्टठा की जा सकती है लेकिन चुनाव जीतना मील का पत्थर साबित होगा।

लोगों का मानना है कि भाजपा का प्रत्याशी कोई बाहरी न होकर अपने जनपद का ऐसा व्यक्ति हो जो जनपद की समस्याओं को जानता, समझता हो तथा आम जन के बीच का हो और विकास की वकालत कर सकता हो तथा योजना बनाकर काम कर सकता हो।

2014 का चुनाव मथुरा जनपद के लिये आम जनता और अन्य पार्टियां भी भाजपा की तरफ देख रही हैं कि भाजपा का प्रत्याशी कौन घोषित होता है भाजपा प्रत्याशी के घोषित होते ही समीकरण खुलकर सामने आ जायेंगे।

मथुरा जनपद के प्रत्याशी के लिये भी भाजपा के शीर्ष नेता लगे हुए हैं सब अपने अपने चहेतों को चुनाव मैदान में उतारना चाहते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपनी चार सालियों में से सबसे छोटी साली के पति अरूण सिंह की वकालत कर रहे हैं तो बताया जाता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली भी मथुरा से भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व प्रवक्ता श्रीकान्त शर्मा को लाना चाहते हैं। पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी खुद फिल्म अभिनेत्री ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी को लाना चाहते हैं जबकि संघ की एक लाॅवी जो पहले से पूर्व सांसद चैधरी तेजवीर सिंह से सम्बन्धित है। वह उसी तेजवीर सिंह को पुनः लाना चाहते हैं जो 2004 में बुरी तरह से पराजित हो चुके हैं। उनको पुनः पार्टी का लोकसभा का टिकट दिलाने के पक्षधर हैं। भारतीय जनता पार्टी में यह कोई नई वात नहीं है पूर्व में भी इस प्रकार के प्रयोग होते रहे हैं कि किसी ने किसी के दुख दर्द में साथ निभाया तो उसे मथुरा की टिकट थमा दी गई। फिर गुरू शिष्य के सम्बन्धों के कारण मथुरा विधानसभा की टिकट दी गई थी दोनोें ही वार यह प्रयोग सफल नहीं हुये और हार का मुह देखना पडा।

लोकसभा का चुनाव इस वार रौचक होगा। क्यों कि सारी पार्टियां और आम जनता भाजपा की तरफ देख रही हैं भाजपा प्रत्याशी की घोषणा के साथ ही सारे समीकरण खुलकर सामने आ जायेंगे। अब देखना है कि मथुरा के सांसद के लिए कौन सा प्रत्याशी यहां की जनता के लिये पहली पसन्द होगा तथा भारतीय जनता पार्टी एक वार पुनः अपने चहेतों पर दाव लगाती है अथवा जनता के बीच का मजबूत प्रत्याशी चयन कर उसे अपना प्रत्याशी घोषित करती है इसी पर मथुरा की पहचान और भाजपा की ताकत और सोच ही मथुरा के भाग्य का फैंसला करेगा।


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