बृज साहित्य कवियों की कविताओं से गूॅज उठी सूर कुटी

गोवर्धन। बृज साहित्य परिषद गोवर्धन के तत्वाधान में आयोजित मासिक कवि गोष्ठी सूरवाल विद्या मंदिर परासोली सूरकुटी प्रांगण में पण्डित देवकी नन्दन कुम्हेरिया की अध्यक्षता में हुई। गोष्ठी का शुभारम्भ वृन्दावन से पधारे कवि अरूण भदावरी द्वारा प्रस्तुत माॅ शारदे की वन्दना से किया गया। श्वेत वस्त्र धारे मातु बैठी श्वेत पदमासन, श्वेत ही मुकुट शीष लोक यश छायौ है। वही राष्ट्रीय चिन्तन से ओत प्रोत सम सामयिक रचना पढते हुए राजस्थान से पधारे कवि सुरेश शास्त्री ने बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान पर कविता प्रस्तुत बेटी बचानी है, बेटी पढानी है। बेटी तो हर युग में होती कल्याणी है पर जमकर तालियाॅ बटोरीं। इसी क्रम कवि डा0 जगदीश शास्त्री ने अपनी कविता के माध्यम से कहा कि गई कालिमा और लालिमा शौभा चली गई तन से, समझ नही पाया में तुझको ईष्र्या तू न गई मन से कवियों की कवितों को सुन दर्शक सोचने पर मजवूर हो गये। कार्यक्रम के अध्यक्ष पं0 देवकी नन्दन कुम्हैरिया एवं हरीवावू ओम ने काव्य पाठ की सुर लहरियों के साथ कविता प्रस्तुत करते हुए सभी आगन्तुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर वाल कृष्ण स्वामी मंगतुराम कौशिक मेघश्याम शर्मा राकेश शर्मा राजेश सेनी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।


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