
मथुरा। कुख्यात अपराधी ब्रजेश मावी की हत्या को लेकर खड़े हो रहे सवालों के बीच जो ठोस जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक मथुरा से हाथरस पहुंचने के बाद के पूरे घटनाक्रम से यदि कोई पर्दा उठा सकता है तो वह है हाथरस पुलिस। हाथरस पुलिस के अलावा ब्रजेश मावी के साथ गये उसके साथी प्रमोद चैधरी तथा गोपाल यादव भी सच्चाई से भलीभांति परिचित हैं किंतु मथुरा पुलिस न तो हाथरस पुलिस से कुछ निकलवा पा रही और न प्रमोद चैधरी व गोपाल यादव से। हाथरस से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेश टोंटा ने ब्रजेश को ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी उसके वहां पहुंचने से पहले ही कर ली थी। यहां तक कि हत्या के बाद उसकी लाश को ठिकाने लगाने से लेकर इलाका पुलिस से सेटिंग करने और मौका-ए-वारदात से सारे सबूत नष्ट करने का इंतजाम भी पहले से कर रखा था।
चूंकि ब्रजेश की नजर में राजेश टोंटा उसका एक शागिर्द और सेवक था इसलिए वह बिना किसी तैयारी के वहां जा पहुंचा और इसलिए टोंटा को उसे ठिकाने लगाने में कोई विशेष परेशानी नहीं हुई। बताया जाता है कि शहर की घनी आबादी के बीच बने टोंटा के मकान से गोलियां चलने और कत्ल होने की जानकारी इलाका पुलिस सहित तमाम क्षेत्रीय नागरिकों को अच्छी तरह है लेकिन इलाका पुलिस टोंटा से सेंटिंग के चलते मथुरा पुलिस को सहयोग नहीं कर रही और क्षेत्रीय नागरिक टोंटा के खिलाफ मुंह खोलने की हिमाकत कर नहीं सकते।
जहां तक सवाल ब्रजेश मावी की अब तक लाश भी न मिलने का है तो टोंटा को जानने वाले जरायम की दुनिया के उसके साथियों का कहना है कि ऐसा कारनामा करना उसके बांए हाथ का खेल है। पहले भी उसने जितनी हत्याओं को अंजाम दिया है, उनमें से किसी की लाश नहीं मिली और ना कोई ठोस सुराग पुलिस के लिए छोड़ा। यही कारण रहा कि अनेक जघन्य वारदातें करने के बावजूद आज तक वह हाथरस में आराम से पुलिस की नाक के नीचे रह रहा था।
बताया जाता है कि पुलिस से उसके मधुर संबंध हमेशा रहे हैं और ब्रजेश मावी की हत्या के मामले में भी इलाका पुलिस ने उसे सुरक्षित भाग निकलने का पूरा मौका उपलब्ध कराया। राजेश टोंटा कितना शातिर है इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रजेश मावी को भी उसने तब इस्तेमाल कर लिया था जब उसकी अपनी कोई पहचान अपराधियों के बीच खास नहीं थी जबकि ब्रजेश मावी का टैरर कायम हो चुका था। ब्रजेश मावी से उसने हाथरस में 18 जून 2002 को एडवोकेट भूपेन्द्र सिंह का मर्डर करवाया था। भूपेन्द्र सिंह की हत्या दिन दहाड़े हाथरस कचहरी में मावी और उसके साथियों ने की थी। इस हत्या में टोंटा व एक अन्य व्यक्ति नामजद हुआ था जबकि मावी सहित दो के नाम बाद में पुलिस ने शामिल किये थे। टोंटा उसमें साफ बच निकला। इसके बाद ब्रजेश मावी गिरफ्तार कर लिया गया और वह फिर लंबे समय तक जेल में रहा। इसी बीच राजेश टोंटा ने कई संगीन वारदातों को अंजाम देकर अपराध की दुनिया में अपना कद काफी बढ़ा लिया और लोगों के बीच खासी दहशत पैदा कर दी। इधर लंबे समय बाद जेल से रहा होकर आया ब्रजेश मावी अब तक यही समझता रहा कि कभी उससे मदद मांगने वाला राजेश टोंटा उसका शागिर्द और सेवक है तथा उसका अहसान मानता है। मावी की यही गलतफहमी उसके मारे जाने की सबसे बड़ी वजह बनी।
जहां तक सवाल मावी द्वारा खुद को किसी साजिश के तहत गायब किये जाने की चर्चाओं का है तो वह इसलिए बेबुनियाद नजर आती हैं क्योंकि वह बाकायदा जमानत पर रिहा हुआ था और उसके खिलाफ दर्ज अधिकांश बड़े केस निपट चुके थे। मथुरा में भी अब उसके खिलाफ कोई बड़ा केस लंबित नहीं था और बबलू गौतम की हत्या का सच भी पुलिस के सामने आ चुका था। सन् 2011 के बाद से उसके खिलाफ कोई नया केस रजिस्टर्ड नहीं हुआ और इसीलिए उसने अब खुद को जमीनों की खरीद फरोख्त के कारोबार से जोड़ लिया था। मथुरा में उसके साथियों की मानें तो वह बाकी मामलों के निपटने का इंतजार कर रहा था ताकि बाकी जिंदगी आराम से काट सके। ऐसे में उसके द्वारा खुद किसी साजिश के तहत गायब होने की कहानी आसानी से गले नहीं उतरती। रही बात अब तक मथुरा पुलिस के हाथ किसी ठोस सुराग के न लग पाने की तो उसमें हाथरस पुलिस के अलावा मथुरा पुलिस के भी कुछ लोगों की बड़ी भूमिका है और उन्होंने पहले दिन से इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया था। ऐसे में आला पुलिस अफसर यदि हाथरस और मथुरा के अपने ही विभाग में मौजूद अपराधियों के सहयोगी पुलिसजनों से सच्चाई उगलवा सकें तो सच्चाई भी शीघ्र सामने आ सकती है वर्ना जैसे-जैसे समय व्यतीत होगा, ब्रजेश मावी का मर्डर भी मिस्ट्री बनकर रह जायेगा। साथ ही कुछ समय बाद राजेश टोंटा फिर किसी संगीन वारदात को अंजाम देने के लिए इत्मीनान के साथ अपने घर आकर रहने लगेगा।






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