मौत का समय निश्चित, श्वांस अनमोल
मथुरा। आगरा-दिल्ली बाई पास स्थित जयगुरुदेव नाम योग साधना मन्दिर के प्रांगण में प्रति वर्ष आयोजित होने वाला जयगुरुदेव सत्संग-मेला आज प्रातः काल प्रार्थना, ध्यान, भजन व सत्संग के साथ विधिवत प्रारम्भ हो गया। भण्डारा के दिन 20 दिसम्बर को प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री श्री शिवपाल सिंह के भाग लेने का समाचार है। पांच दिवसीय सत्संग-मेला के पहले दिन राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चन्द्र एवं डा. करुणाकान्त ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित किया। प्रातःकालीन सत्संग में डा. करुणा कान्त ने कहा कि मौत का समय निश्चित है। श्वाँसें अनमोल हैं। जीवन का सारा खेल श्वाँसों पर ही निर्भर है। शुभ, नेक कर्म करने वालांे की श्वाँसें कम धीमी रफ्तार से खर्च होती हैं। बुरे, पाप-कर्म करने वालों की श्वाँसें तीव्र गति से खर्च होती हैं। इसी कारण प्रायः नेक कर्म करने वाले दीर्घायु और बुरे कर्म करने वाले अल्पायु हो जाते हैं। ईश्वर ने जितनी आजादी इन्सानों को दी है। उतनी आजादी उनके पास नहीं है। मृत्युलोक में मनुष्य शरीर सर्वश्रेष्ठ है। यह बडे़ भाग्य से मिलता है। इसी से साधना करके अपने प्रभु के पास अपनी रूह यानी जीवात्मा को पहुंचाया जाता है। इसके लिये सन्त सत्गुरु की खोज करनी पड़ती है। सायंकालीन सत्संग में सतीश चन्द्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस धरती पर सन्त-महापुरुष जीवों को जन्म-मरण के बन्धन से मुक्त करने के लिये आते हैं। रूह और रूहानियत का पाठ पढ़ाते हंै। उनकी रुहानी तालीम सारे मानव जाति के लिये होती है। वे किसी व्यवस्था को बिगाड़ते नहीं हैं अपितु समाज में व्याप्त अन्ध-विश्वास और कुरीतियों से लोगों को दूर कराते हैं जिससे लोगों को जीवन में अधिक सुख और शान्ति प्राप्त हो सके। अपनी जीवात्मा का कल्याण कर सकें। बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अपने गुरु के आदेश के पालन में 116 वर्ष तक जीवों के कल्याण हेतु शाकाहार अपनाने एवं नशा मुक्त समाज बनाने की अपील लोगों से किया और सुरत-शब्द योग साधना का भेद बताया।





