एरावत महाराज के नेतत्व में राधाकुण्ड के मणिपुरी मन्दिर में की पूजा
राधाकुण्ड। न कोई काम काज की चिन्ता न ही शाही खान-पीन और शाही रहन सहन की। श्रद्वालुओं के मन में आस है तो बस प्रभु मिलन की एंव भक्ति में रचने बसने की। कोई बड़ा व्यापारी है तो कोई बड़ा अधिकारी। सभी सब कुछ छोड़, आए बृज यात्रा में। जी हां हम बात कर रहे है उन सैकडों भक्तों की जिनकी जुबां पर सिर्फ श्रीकृष्ण नाम का जप लगा रहता है। मणिपुर प्रदेश से ब्रज चैरासी कोस की यात्रा करने आए सैकड़ों भक्तों ने श्री धाम राधाकुण्ड के रास विहारी मणिपुर मन्दिर में विधि विधान से पूजा अर्चना कर बृज चैरासी कोस की यात्रा शुरू की। पूजा अर्चना चिंताहरण गोस्वामी द्वारा कराई गई। मणिपुर से आऐ सैकडों भक्तों यात्रा के दौरान श्रीकृष्ण की भक्ती में भाव विभोर एंव भजन संर्कीतन करते हुए बृज यात्रा शुरू की। यात्रा 24 अगस्त से 1 सितम्वर को समापन होगी। महाराज एरावत ने बताया कि प्रति ब्रज चैरासी कोस की यात्रा करने से मालूम हुआ है कि ब्रज मण्डल का हर कण, हर वृक्ष, स्थल पावन कुण्ड और श्री राधारानी जी, यमुना जी, श्री प्रियतम की नित्य निकंुज लीलाओं के साक्षी हैं। श्रीकृष्ण ने अपने ब्रहमत्व का त्याग कर सभी ग्वाल बालों और ब्रज गोपियों के साथ अनेक लीलाएं की हैं। यहां उन्होंने अपना बचपन बिताया। जिसमें उन्होंने ग्वाल बालों के साथ क्रीड़ा गौ चारण, माखन चोरी, कलिया दमन आदि लीलाएं की हैं। इसीलिए हम सभी मणिपुर भक्त प्रभु की भक्ति में रचने बसने के लिए प्रति वर्ष की भांति सैकड़ों भक्त ब्रज चैरासी कोस की यात्रा करने आते हैं। क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने बृज में 11 वर्ष 5 माह 52 दिन तक लीलाऐं की हैं साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने श्री गिर्राज धाम में भी अनेकों लीलाएं की है। यात्रा के व्यवस्थापक संजय अग्रवाल वृन्दावन वाले ने बताया कि मणिपुर के श्रद्वालु चैथी वर्ष बृज चैरासी कोस की यात्रा एरावत सिंह महाराज जी के नेतत्व में सैकड़ों भक्त गिर्राज धाम पधारे है। इन भक्तों की श्रीकृष्ण ने मनोंकांमना पूर्ण की है। इस लिए ये भक्त मणिपुर से प्रति वर्ष बृज चैरासी कोस की यात्रा करने आते हैं। यात्रा श्री धाम राधाकुण्ड से प्रारम्भ हुई भांडीर वन, मान सरोवर, भूतेश्वर, कृष्ण जन्मभूमि आदि स्थानों में सकडों श्रद्वालुओं ने यात्रा की। इस मौके पर महाराज एरावत जी, संजय अग्रवाल वृन्दावन वाले, विवके आरके दूसरी गोपाल, डानी खेलन सिंह, संजय अग्रवाल, यदुमनी, शर्मा बसंत शर्मा, सुधीर सिंह, प्रफुल्ल सिंह, खिडिर रानी देव, कृष्ण गोपाल, तनुजा देवी, विक्टोरिया देवी, चन्द्ररूखी देवी, प्रेम देवी, पुर्णिमासी देवी, महाराज एरावत, मेमे देवी, देवीका, बीना रानी जौय माला, इवेनुंसी देवी, गुनी माला, सनातोम्वो देवी, सायारित देवी, कु0 हरीप्रिया, अनिता, श्याम प्रिया, ओजा मंगी, इवेमपिसक आदि श्रद्वालु भक्त मौजूद थे।





