मन की सुनो तभी मिलेगी सच्ची खुशी- डा0 विनायक

अमरनाथ विद्याश्रम में छात्रों के लिये दिल की सुनो विषयक वार्ता का हुआ आयोजन

अमरनाथ विद्याश्रम में चिकित्सक डा0 विनायक अग्रवाल को स्मृति चिन्ह भेंट करते प्रधानाचार्य आदित्य कुमार वाजपेयी व अन्य

मथुरा। प्रमुख आवासीय शिक्षण संस्थान अमरनाथ विद्याश्रम में विद्यार्थियांे को सम्बोधित करते हुये देश के प्रसिद्ध हाॅस्पीटल मेदांता मेडिसिटी के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा0 विनायक अग्रवाल ने कहा कि प्रकृति के करीब से रहने सच्ची खुशी मिलती है तथा तन मन प्रसन्न रहता है। प्रकृति सबसे बड़ी डाॅक्टर है। विद्यालय में आयोजित वार्ता दिल की सुनो में डा0 विनायक अग्रवाल ने सीनियर विद्यार्थियों से कहा कि उम्मीदों का बोझ तथा भौतिकवाद का स्ट्रैस न लेते हुये हमेशा खुश रहे। हर बच्चा अच्छा होता है, हर बच्चे में प्रतिभा का भण्डार होता है। बच्चों को हमेशा सकारात्मक रहना चाहिये तथा अपने दिल तथा मन की सुननी चाहिये तथा वही बने जो वे बनना चाहते हैं। हमेशा अपने मन की सुननी चाहिये और उन्मुक्त विचारों की भांति सोचना चाहिये। हर बच्चे की प्रतिभा अलग है। बच्चों को अपना विकास इस प्रकार करना चाहिये कि वे चाहे कुछ भी करें पर दूसरो पर निर्भर न रहें तथा खुद को हर प्रकार के प्रेशर से मुक्त रखें व विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य निर्धारित करके ही आगे बढ़ना चाहिये। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने जड़ों से, अपने संस्कारों से जुड़े रहें। अपनी मातृभूमि, अपनी मातृभाषा से प्यार करें। बच्चों को अंग्रेजी आदि भाषायें तो सीखनी चाहिये किन्तु ध्यान रखें कि किसी भी तरह अपनी मातृभाषा का अपमान न हो। उन्होंने मातृकृपा सभागार में उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह देते हुये बताया कि हैल्थ का सम्बन्ध मन से है इसलिये मन को हमेशा शांत रखें जब मन शांत रहेगा तो मन में सिर्फ सकारात्मक विचार ही आयेंगे। यह विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण ब्रजभूमि में स्थित है, यहां के बच्चों के संस्कार बहुत ही अच्छे हैं। यदि जीवन में सफल होना चाहते हो तो बड़ों का आदर करिये तथा टीवी, मोबाईल आदि की स्क्रीन से दूर रहें। खूब मेहनत करिये, मिलजुल कर पढि़ये, ईमानदारी से अपना काम करिये तथा अपने विकास के रास्ते हमेशा खुले रखिये। उन्होंने बच्चों के माता पिता तथा गुरूओं को भी सलाह देते हुये कहा कि बच्चे जैसे भी हैं अच्छे हैं, बच्चांे के विचारों को सुने, उन्हें समझे तथा उन्हें वही बनाइये जो वे बनना चाहते हैं। उनका मानना था कि एकाग्र मन से काम करना ही मेडीटेशन है। विद्यार्थियों ने डा0 अग्रवाल से विभिन्न प्रश्न पूंछ कर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। पूर्व में विद्यालय में पधारने पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डा0 आदित्य कुमार वाजपेयी, उप प्रधानाचार्य डा0 अनिल कुमार, प्रशासनिक अधिकारी डा0 अरूण कुमार तथा शैक्षणिक प्रभारी डा0 अनुराग वाजपेयी ने डा0 विनायक अग्रवाल का माला, पटका व भेंट के द्वारा स्वागत किया तथा उन्हें श्रेष्ठ चिकित्सक सम्मान से सम्मानित कर उनका आभार व्यक्त किया।


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