महारास की भक्ति और होली की मस्ती

हिन्दी और ब्रजभाषा के महान् साहित्यकारए हास्य रसावतारए पùमी गोपाल प्रसाद व्यास के जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में हिन्दी भवन दिल्ली में महारासए मनोहारी मयूर नृत्य और फूलों की होली देखकर राजधानी के शीर्षस्थ कविए साहित्यकारए पत्रकार और रंगकर्मी रस विभोर हो उठे।

 

स्वास्त्तिक रंगमंछल मथुरा के कलाकारों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार श्रीमती वन्दना सिंह के नेतृत्व मंे प्रस्तुत कार्यक्रम के सन्दर्भ में संयोजक एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि महारास भगवान् श्रीकृष्ण की काम जयी तथा ब्रज गोपिकाओं के मान भंग की वह लीला हे जिसमें श्रीकृष्ण के प्रति ब्रज गोपिकाओं की निश्छल प्रीतिए श्रीकृष्ण के वियोग में विरह दृ व्यथा और महारास में प्रत्येक गोपी की श्रीकृष्ण के साथ महारास में नृत्य करने की अनुभूति का चित्रण किया गया है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि महारास की यह प्रस्तुति श्री गोपाल प्रसाद व्यास की काव्य दृ कृति ष्रास रसामृतष् से उत्प्रेरित है।

कार्यक्रम की निर्देशक श्रीमती वन्दना सिंह ने बताया कि यह प्रस्तुति मात्र महारास न होकर ब्रजराज रासेश्वर कृष्ण और रासेश्वरी श्री राधा के प्रति सभी कलाकारों की भावांजलि है।

हिन्दी भवन के महामंत्री तथा सुप्रसिद्ध हास्य दृ व्यंग कवि गोविन्द व्यास ने व्यास ने मोहन स्वरूप भाटिया तथा श्रीमती वन्दना सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें उत्तरीय उढ़ाकर तथा प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

 

 

महारास की प्रभावी के पश्चात् बरसाना के निकट स्थित मोर कुटी में मोरों का नृत्य देखने गईं राधा जी मोर न मिलने पर जब उदास हो उठीं तो ष्कान्हा मोर बनि आयौष् के साथ श्रीकृष्ण ने स्वयं मोर बनकर राधाजी को प्रसन्न किया। और कलाकारों ने इस भाव को मनोहारी मयूर नृत्य के रूप में मंचित कर खचाखच भरे सभागार में उपस्थित दर्शकों को आनान्दित कर दिया।

कार्यक्रम श्रंखला में कलाकारों ने सतरंगी फूलों साथ इन्द्रधनुषी होली की प्रस्तुति की जिसके प्रथम चरण में लठामार होलीए ष्रसिया कूँ नारि बनावो रीष् में कृष्ण को चूनरी पहना कर नारी बना दिया और द्वितीय चरण में गोपियों ने फूलों से होली खेलते हुए इतने फूल बरसाये कि राधा दृ कृष्ण नख से शिख तक फूलों से ढक गये और जब उन्होंने उन फूलों को उछाला तो मंच ही नहीं पूरा सभागार फूलों से महक उठा।

सभागार में उपस्थित महिलाएँ तो स्वतः प्रेरणा से मंच पर आ गईं और राधा दृ कृष्ण के स्वरूपों पर फूल बरसाने लगीं तो हिन्दी भवन का यह मंच राधा दृ कृष्ण की लीला स्थली बन गया। कार्यक्रम के समापन पर दर्शक इतने भाव दृ विभोर थे कि उनके मन में राधा दृ कृष्ण की लीलाओं के दर्शक की अतृप्त प्यास बनी रही।

 

कार्यक्रम के समापन पर अनेक दर्शकों ने मंच पर आकर भावुक स्वरों में कहा कि उन्हें हर क्षण यह अनुभव हुआ कि वे द्वापर युग में राधा दृ कृष्ण की लीलाओं का दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं।

अन्त में सभी कलाकारों को प्रशस्ति दृ पत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान किये गये और विहारी जी के प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

समारोह में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित विद्वान डा0 रवीन्द्र नागरए राजधानी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार वीरेन्द्र प्रभाकरए शीला झुनझुनवालाए शेरजंग गर्गए कमला सिंघवीए प्रदीप पन्तए प्रेम जन्मेजयए अंजलि भारद्वाजएए रत्ना कौशिकए हरी शंकर बर्मनए निर्मला जैनए चन्द्र मोहनए मधुकान्त वत्सए रामनिवास जाजू रमा पांडेय आदि ने एक स्वर से श्रीमती वन्दना सिंह की मुक्त कंठ से सराहना की।

 


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