भक्ति, वैराग्य, ज्ञान एवं सेवा की साक्षात मूर्ति थे स्वामी गीतानंद महाराजः डा. अवशेषानंद महाराज
गीतानंद महाराज की 11वीं पुण्य तिथि पर हुए विभिन्न कार्यक्रम
श्रद्धांजलि समारोह में संत, महंत, धर्माचार्य,समाजसेवी एवं राजनेताओं का लगा मेला
विशाल भंडारे में ब्रज क्षेत्र के साधुओं का लगा कुम्भ
मथुरा। देश के प्रख्यात संत स्वामी गीतानंद महाराज भिक्षु जी की 11वीं पुण्य तिथि विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाई गई। इस दौरान देश के भर से आए प्रख्यात महंत, संत और धर्माचार्यो ने आध्यात्म चिंतन के साथ महाराश्री को नमन कर भावांजलि अर्पित की। वहीं समाज सेवियों ने भी समाज और राष्ट्रहित में संत गीतानंद महाराज द्वारा किए गए कार्यो को याद कर उनसे प्रेरणा लेने पर जोर दिया।
वंृदावन स्थित अनुपयति गीता आश्रम के सभागार में रविवार को दिव्य भव्य भजन समारोह का भी आयोजन हुआ। देश के प्रख्यात भजन सम्राट महावीर शर्मा जी के टीम द्वारा भजनों की लगातार श्रंृखला प्रस्तुत की गई। जिस पर श्रोता झूमते और थिरकते नजर आए। ऐसा लगा जैसे राधा-कृष्ण की प्रेममयी लीला वचनों में साक्षात प्रस्तुत हो रही हो। भजन एवं श्रद्धांजलि समारोह में देश विदेश से आए महाराजश्री के अनुयायियों, भक्तों और शिष्यों ने महाराज श्री के स्मरण सुनाकर माहौल को भावमय कर दिया।
इस अवसर पर गीतानंद जी महाराज के परम शिष्य महामंडलेश्वर डा. अवशेषानंद महाराज की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि आयोजित हुई। उन्होंने कहा कि महाराजश्री की भक्ति के साथ-साथ मानवता की सेवा में विशेष रूचि थी। उन्होंने देश में किसी तरह की आपदा आई हो या फिर सीमा पर युद्ध हो हर समय अपनी सरल ह्रदयता का दर्शन कराते हुए पीडिघ्त मानवता की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। कहा कि महाराजश्री के प्रकल्पों, अन्न क्षेत्र, वृद्धाश्रम, गौशाला, चिकित्सालय आदि उसी दिशा का प्रमुख अंश हैं। महापुरुष अपनी कीर्ति को छोड़ देते हैं जो बाद में लोगों को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। गीतानंद महाराज जैसे सद्गुरु दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। साधुओं की साधना में किसी प्रकार का व्यवधान न आए इसलिए ही उन्होंने वंृदावन एवं हरिद्वार में जैसे अन्न क्षेत्र चलाया।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि महाराजश्री के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति सफलता के सोपान पर चढ़ सकता है। वहीं उनके सानिध्य और दर्शन से भक्त को शांति का अनुभव होता है। महाराज श्री ने गीता, वाणी और प्रवचन के माध्यम से लोगों में जनजाग्रति पैदा की, वहीं आध्यात्म के माध्यम से मानव को जोडने का जो काम किया वह हमेशा स्मरणीय रहेगा। प्रमुख संतों ने कहा कि महाराजश्री ने गीता पंचामृतम समेत अनेक ग्रंथों की रचना कर भक्तों का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने जीवन पर्यंत श्रीमद् भागवत गीता का प्रचार प्रसार कर भक्तों को सदमार्ग पर चलने का संदेश दिया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ महाराजश्री के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं पुष्पार्चन कर किया।
समारोह में स्वामी गोविंदा नंद तीर्थ महाराज, पदम श्री कृष्ण कन्हाई चित्रकार, फूलडोल जी महाराज, डा. केशवाचार्य महाराज, वरिष्ठ पत्रकार देशभक्त वाजपेयी, उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं ब्रज प्रेस क्लब अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु एडवोकेट, भागवताचार्य डा. मनोज मोहन शास्त्री, राधाकृष्ण पाठक, श्रीकृष्ण सरस, शैलेंद्र नाथ पाठक, बिहारी लाल वशिष्ठ, सेवा नंद ब्रह्मचारी, बालकृष्ण गौतम, एसपी शर्मा, इंग्लैंड से आए प्रकाश अरोड़ा, पानीपत से युधिष्ठर शर्मा, दर्शन पवेजा, आचार्य राजेंद्र महाराज, बलभीम पानीपत, सिद्धांर्थ कुमार, नवल गिरी जी महाराज। समारोह का संचालन रामजीवन शर्मा ने किया।





