नई दिल्ली। बैंकों से 9000 करोड़ से अधिक का कर्ज लेकर देश से भागे विजय माल्या को वापस लाने के लिए अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंटरपोल से मदद मांगी है। ईडी ने इंटरपोल से कहा है कि वह माल्या के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करें। ईडी ने माल्या के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस और गिरफ्तारी को लेकर सीबीआई हेडक्वार्टर में भी एक पत्र भेजा है। इससे पहले ईडी ने अलग-अलग कंपनियों में माल्या के शेयर फ्रीज करने की प्लानिंग की थी। ऐसा करने पर माल्या किसी और कंपनी में पैसा नहीं लगा पाएंगे।
ईडी का यह कदम ब्रिटिश सरकार के उस जवाब के ठीक अगले दिन आया है, जिसमें कहा गया था कि माल्या को भारत में डिपोर्ट नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनके पास ब्रिटेन का रेजिडेंसी परमिट 1992 से ही है। ब्रिटेन ने कहा था कि उनके यहां ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके आधार पर माल्या को निकाला जा सके। लेकिन यह भरोसा दिया है कि भारत अगर प्रत्यर्पण के लिए कोशिश करेगा तो उसमें वह पूरा सहयोग करेगा।
वहीं इस मामले पर राज्यसभा में जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ब्रिटेन इससे पहले भी इसी तरह के कदम उठा चुका है। हम इसका दूसरा रास्ता तलाश रहे हैं। जैसे ही इस मामले की जांच पूरी होगी, तब हम प्रत्यर्पण की मांग रखेंगे। जांच एजेंसियां लगातार इस बात पर काम कर रहीं हैं कि इस मामले में बैंकों की ओर से क्या चूक हुई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि ब्रिटेन की सरकार ने सूचित किया है कि 1971 आव्रजन कानून के तहत देश में रहने के लिये वैध पासपोर्ट रखने की मांग नहीं की जा सकती है। हालांकि उनके खिलाफ आरोपों की गंभीरता को देखते हुए परस्पर कानूनी सहायता अथवा प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया है।
फर्जी कंपनियों का भी पता चला देश के 17 बैंकों से 9000 करोड रुपये कर्ज लेकर न चुकाने वाले माल्या की संपत्तियों की जांच में ईडी की टीमें लगातार जुटी हैं। ईडी ने माल्या की उन कंपनियों का भी पता लगाया है, जो फर्जी पतों पर रजिस्टर की गई हैं।
साभार-khaskhabar.com






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