सुनील शर्मा मोक्ष की प्राप्ति और मृत आत्माओं की शान्ति के लिये यमुना किनारे शवों का दाह संस्कार किया जाता है। लेकिन आज इन मृत आत्माओं के लिये यमुना जल भी नसीब नहीं है। यमुना नदी में शहर के गंदे नाले तो जाकर मिल सकते है लेकिन मृत आत्माओं की शरीर के अवशेष यमुना में नही जा सकते है। अब किसी भागीरथ की पुनः आवश्यकता है जो कि मोक्षधाम के आस.पास इकट्ठा हो रहे मृत शरीर के अवशेषों के लिये यमुना को यहां तक ला सके।
राजा सगर के पुत्रों की मुक्ति के लिये भागीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर अवतरित करके जहां उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्थ किया था वहीं आज तक यमुना हमारे जीवन और संस्कृति का अंग है। लेकिन जहां मथुरा भी धार्मिक स्थानों में से एक है जहां यदि किसी की मृत्यु हो जाती है और उसे यमुना नदी का जल मिल जाय तो उसकी पूर्ण मुक्ति मानी जाती है। नारद पुराण के अनुसार ष्ष्अयोध्या मथुरा माया काशी कांची ह्यवन्तिका पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाष्ष् भारत की सात मोक्ष दायिनी पुरियों में से मथुरा भी एक पुरी मानी गयी है। जिसका आम जनमानस में बड़ा महत्व हैं। लेकिन शहर के बीचों.बीच बने दो शवदाह गृह ऐसे हैं। जिनमें अब तक लाखों मृत शरीरों को जलाया जा चुका है। लेकिन मजबूरी में परिवारी जन इन शवदाह ग्रहों में अपने इष्ट मित्र परिजनों आत्मीय जनों की दाह क्रिया तो करते है लेकिन दाह क्रिया के बाद क्या उनके शरीर के अवशेष यमुना नदी में प्रवाहित हो पाते है। यह कोई न तो सोचता है न ही देखता है।
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मान्यता है कि मृत शरीर की दाह क्रिया के बाद बचे अवशेष को यमुना में प्रवाहित किया जाय तभी मृत आत्मा को मुक्ति मिल पाती है। लेकिन आज तक लाखों आत्माएं मुक्ति की बाट जोह रही है शायद इन्हें मुक्ति नहीं मिली हो क्योंकि इनके अवशेषों को यमुना नदी में तो बहाया ही नहीं गया हैं।
करोंड़ों रुपया खर्च करने के बाद नगर के धन्नासेठों ने पुण्यलाभ की कामना से मोक्षधाम का निर्माण तो कराया लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया कि मृत शरीर के अवशेष यमुना तक कैसे पहुंचेंगे। न ही यमुना इनके निकट आ सकती है ओर न ही मोक्षधाम यमुना के निकट जा सकता है। मोक्षधाम व यमुना के बीच भी यमुना में किसी अन्य पार्टी की जमीन है वह अपनी जमीन से किसी प्रकार की नाली भी यमुना तक नहीं निकालने देता है। इससे अवशेषों को किसी तरह से भी यमुना में प्रवाहित नहीं किया जा सकता है।
उपर से पालिका प्रशासन ने मोक्षधाम के पीछे अपना खत्ता यानी पूरे शहर का कूड़ा करकट डालने का डलावघर तो बना दिया है। लेकिन मोक्षधाम से लेकर यमुना तक कोई व्यवस्था नहीं की है।
हजारों लाखों ब्रज में मरने वाले मुक्ति के लिये भटक रहे है उनके मृत शरीर के अवशेष यमुना में मिलने को तड़फ रहे है तथा परिवारीजनों मलाल है कि उनके परिजनों आत्मीय जनों को यमुना का जल नहीं मिल पा रहा है। आज यमुना नदी की स्थिति क्या है यह किसी से छुपी नही है। इसमें शहर का गंदा पानी नालों का पानी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से गिर सकता है लेकिन शवदाह गृहों में मृत शरीर के अवशेष को यमुना में नहीं बहाया जा सकता है। कैसे होगी ब्रजवासियों की मुक्ति कौन पुनः भागीरथ की तरह आयेगा और इन मृत आत्माओं की मुक्ति के लिये यमुना को यहां तक लायेगा।





