मथुरा। 20 हजार करोड़ रूपये भारत सरकार द्वारा गंगा के लिए देना और यमुना के लिए 20 रूपये भी नहीं, इससे यह पता चलता है कि यमुना के लिए केन्द्र सरकार कुछ करना नहीं चाहती यह बहुत बड़ा भेदभाव है। अभी तक सरकारें आश्वासन देती आ रही हैं लेकिन काम कहीं नहीं दिख रहा है। इसका परिणाम यमुना पट्टी के लोग असमय काल के गाल में समा रहें हैं। यमुना रक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास ने कहा कि ब्रज का ऐसा कोई गाँव नहीं जहां इंसान के पीने योग्य पानी हो। ब्रज का सारा पानी विषाक्त हो गया है। हर वर्ष हजारो लोग कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से काल के गाल में समा रहें हैं। अनकी जीवन रक्षा करना सरकार का काम है क्यों कि यमुना को जहरीला बनाने में सरकार का हाथ है। संत जी ने कहा कि आन्दोलन की कोईं अन्तिम सीमा नहीं होती है। जब तक यमुना स्वच्छ व अविरल नहीं हो जाती तब तब आन्दोलन जारी रहेगा। इसी संदर्भ में दिनांक 19 मई को प्रातः 9 बजे से गोविन्द मठ, वृन्दावन में यमुना रक्षक दल के सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ता समेत एक बैठक बुलाई है, ताकि आगे की रणनिति पर विचार विमर्श किया जाये। उसी दिन केन्द्र ंसरकार और राज्य सरकार दोनों यमुना के मुद्दे पर उदासीनता व विचार होगा। साथ ही कई कार्यक्रम बनाये जायेंगे। ब्रज के हर गाँव की पानी की जाँच हो तथा सबके स्वाथ्य परिक्षण हो। उन्होने बताया कि अभी मैं वाटी गाँव, नरी, सेमरी, अकबरपुर, तरौली, भरतीया, नारायणपुर आदि गाँव का दौरा किया जहां हर गाँव में दर्जनों लोग कैंसर के बीमारी से काल के गाल में समा गये यह महामारी का रूप लेता जा रहा है। इसका निदान तुरन्त होना चाहिए।





