रमण रेती आश्रम में नृत्य - नाटिका नरसी का भात का मंचन हजारों दर्शक भक्ति - भाव विभोर

  

सन्त प्रवर स्वामी गुरुशरणानन्द महाराज के रमण रेती आश्रम में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार श्रीमती वन्दना सिंह के निर्देशन में मंचित नृत्य - नाटिका ’ नरसी का भात ’ के मार्मिक प्रसंगों पर भक्तजनों की अश्रुधारा प्रवाहित हुई वहीं भक्त वत्सल भगवान् द्वारा नरसी भगत पर कृपा के दृश्यों पर हर्ष ध्वनि के साथ नरसी भगत का जय - जयकार हुआ।

बंगाल से आये कुशल शिल्पकारों द्वारा कलात्मक मंच का निर्माण किया गया था। यहाँ व्यास पीठ पर विराजित श्रीमती वन्दना सिंह ने धाराप्रवाह शैली में गुजरात में जन्मे नरसी में मेहता की भक्त गाथा का वर्णन किया और कलाकारों ने सम्बन्धित दृश्यों का गायन एवं नृत्य के साथ अत्यन्त प्रभावी मंचन किया।

नृत्य नाटिका में नरसी भगत की कर्कषा भाभी द्वारा उन्हें प्रताडि़त किए जाने और भक्त वत्सल भगवान् द्वारा अपने भक्त की रक्षा करने के लिए धेवती के विवाह में भात लेकर पहुँचना तथा पूरे नगर को भात पहनाना, सन्तों को दी गई हुन्डी को सेठ साँवल शाह के रूप में पहुँच कर धनराशि प्रदान करना आदि के द्वारा भक्त के वश में भक्त वत्सल भगवान् का चित्रण किया गया था।

’नरसी का भात ’ नृत्य नाटिका में रासलीला , गोवर्धन धारण लीला , गिरिराज जी को समर्पित छप्पन भोग आदि श्रीकृश्ण लीलाओं को भी आकर्षक दृश्यों के साथ प्रदर्शित किया गया था।

नृत्य - नाटिका ’ नरसी का भात ’ का आलेख प्रामाणिक ग्रन्थों के आधार पर तैयार किया गया था और श्रीमती वन्दना सिंह के निर्देशन में कु0 अर्चना वर्मा , प्रियांशु द्विवेेदी , रीना , गुन्जन , खुशबू , दीक्षा , जागृति , मणिका , दिव्या , कृष्णा , पायल , दीपिका , उदय , राधावल्लभ , देवेश , प्रहलाद तथा वाद्य वृन्द वादक प्रोफेसर रूपेश मिश्रा , रामेश्वर , गौरव आदि कलाकारों ने एक माह तक पूर्वाभ्यास कर अथक परिश्रम किया था। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में संयोजक मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि आज की पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति , फिल्म और टीवी के दुष्प्रभाव में उन भक्त - गाथाओं को भूलती जा रही है जो ईश्वर भक्ति और स्वस्थ समाज की रचना का प्रेरणा स्त्रोत रही हैं।

उन्होंने कहा कि वन्दना जी ने पारम्परिक कार्यक्रम महारास , मयूर नृत्य , फूलों की होली , चरकुला नृत्य आदि के बाद ’ नरसी का भात ’की प्रस्तुति का प्रभावी मंचन स्वामी गुरुशरणानन्द जी महाराज के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए उन्हें समर्पित किया है।

कार्यक्रम के समापन पर स्वामी गुरुशरणानन्द जी महाराज ने कलाकारों को आशीर्वाद प्रदान किया और देवेश चतुर्वेदी ने कलाकारों को उत्तरीय उढ़ा कर सम्मानित किया।  

व्यास पीठ पर श्रीमती वन्दना सिंह , नरसी का भात , गोवर्धन धारण लीला , रासलीला, हजारो दर्शक गण, महाराज जी द्वारा वन्दना सिंह को आशीर्वाद, महाराज जी द्वारा कलाकारों को आशीर्वाद


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