वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2016 की थीम है ‘‘नो योर नंबर्स’’

वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे पर मरीजों के साथ नयति हॉस्पीटल की चिकित्सकीय टीम

मथुरा। हाइवे एनएच 2 पर स्थित नयति मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पीटल में आज मंगलवार हाइपरटेंशन दिवस मनाया गया, जिसमें लोगों को उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) का शुरूआती दौर में पता लगाने और उसकी रोकथाम के बारे में जागरूक करने की कोशिश की गई। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2016 की थीम है ‘‘नो योर नंबर्स’’

नयति हॉस्पीटल की टीम द्वारा कार्डियक सर्जिकल समस्या से पीड़ित 15 से ज्यादा मरीजों का कार्डियक सर्जरी के माध्यम से सफलतापूर्वक उपचार किया गया है। हाइपरटेंशन दिवस पर  चिकित्सकों ने बताया कि अगर उच्च रक्तचाप को नज़रअंदाज किया जाता है और उसका सही उपचार नहीं होता है तो इसकी वजह से हार्ट अटैक, स्ट्रोक पक्षाघात (स्ट्रोक-पैरालाइसिस), किडनी फेल्योर्स और अन्य विकार होने का खतरा रहता है। 

इस अवसर पर कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख और कार्डियक साइंसेज के चेयरमैन डॉ. वेणुगोपाल राम राव ने कहा ‘‘उच्च रक्तचाप को हाइपरटेंशन के नाम से भी जाना जाता है और यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें रक्त का दबाव सामान्य दायरे से ज्यादा होता है। इससे लाखों भारतीय प्रभावित हैं। अनुमान के मुताबिक हाइपरटेंशन की वजह से हर साल करीब 11 लाख लोगों की मौत होती है, जिनमें से करीब 11 प्रतिशत मौत के मामले भारत में होते हैं। इससे पीड़ित लोगों को इस जटिल बीमारी से बचाव एवं निजात दिलाने के लिए आज बुधवार और कल बृहस्पतिवार को निःशुल्क जांच शिविर लगाया जा रहा है। 

नेफ्रोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. कृष्ण मोहन ने कहा, ‘‘उच्च रक्तचाप और किडनी का अन्योनाश्रय संबंध है। उच्च रक्तचाप जहां किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और क्रोनिक किडनी डिज़िज (सीकेडी) का कारण हो सकता है, वहीं किडनी की बीमारियों की वजह से उच्च रक्तचाप हो सकता है। 


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