वेद मंदिर में चतुर्वेद परायण यज्ञ का शुभारंभ

धार्मिक कार्य सर्वसाधारण को ध्यान मंे रखकर किये जाते हैंरू स्वदेश

18 दिन चलने वाले यज्ञ की 25 दिसम्बर को होगी पूर्णाहुति

मथुरा। संसार के उपकार को ध्यान में रखते हुए गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मसानी स्थित श्री गुरूविरजानंद आर्ष गुरूकुल वेद मंदिर में अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश जी महाराज के सानिध्य में सोमवार से चतुर्वेद परायण यज्ञ का शुभारंभ हो गया। प्रथम याज्ञिकों द्वारा ऋग्वेद के मंत्रों से आहुति दी गईं। इस अवसर पर आचार्य स्वदेश महाराज ने कहा कि धार्मिक कार्य सर्वसाधारण के कल्याण को ध्यान में रखकर किये जाते हैं। बिना सर्वसाधारणजनों के सहयोग से इनका पूरा होना असंभव है और सबकी सहभागिता के बिना यह कार्य निरर्थक है। यज्ञ के ब्रम्हा आचार्य ब्रजेश शास्त्री ने यज्ञ की महिमा पर प्रकाश डालते हुए यज्ञ का महत्व समझाया। वेदपाठ गुरूकुल विश्वविद्यालय के ब्रम्हचारियों द्वारा सस्वर किया गया। ब्रम्हचारियों द्वारा गाये ईश्वर भक्ति भजनों ने सबका मन मोह लिया। आर्य वीर दल के महामंत्री व वेद मंदिर के मीडिया प्रभारी विवेक प्रिय आर्य ने बताया कि 18 दिन तक चलने वाले चतुर्वेद परायण यज्ञ की पूर्णाहुति 25 दिसम्बर को होगा। कार्यक्रम प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से 11.30 तक और सायं 2 बजे से 5 बजे तक रहेगा। श्री आर्य ने बताया कि पूर्णाहुति वाले दिन वेद मंदिर स्थित नव नर्मित सत्य प्रकाशन का भव्य उद्घाटन होगा। तथा सभी श्रद्धालुओं के लिए भण्डारे का आयोजन किया जायेगा। श्री आर्य सभी याज्ञिकों से यज्ञ में भाग लेने की अपील की है। 

प्रथम दिन यज्ञ में आचार्य ब्रजेश शास्त्री, आचार्य शत्रुजित शास्त्री, नवीन शर्मा, विवेक प्रिय आर्य, कृष्णगोपाल गुप्ता, धर्मेन्द्रनाथ सक्सैना, प्रेम सिंह जादौन, राजीव तिवारी, कन्हैयालाल आर्य व गुरूकुल के ब्रम्हचारी उपस्थित थे।


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