मथुरा। हिन्दी और ब्रजभाषा काव्य के विद्वान एवं साहित्यकार डा. विष्णु विराट स्मृति समारोह का प्रारंभ वल्लभकुल सम्प्रदाय के षष्ठपीठाधीश्वर गोस्वामी द्वारकेश लाल महाराज, संगोष्ठी अध्यक्ष विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के पूर्व आचार्य डा. हरिमोहन बुधौलिया, सन्त राजा बाबा, विराट जी की पत्नी डा. ब्रजबाला चतुर्वेदी तथा समारोह संयोजक मोहन स्वरूप भाटिया द्वारा माँ सरस्वती तथा डा. विष्णु विराट के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण तथा विशिष्ट अतिथियों द्वारा पुष्पांजलि से प्रारंभ हुआ। संयोजकीय वक्तव्य में मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि जीवन का अन्तिम सत्य है मृत्यु किन्तु कुछ लोग जीवित रहते हुए मृतक समान रहते हैं और कुछ लोग मृत्यु के पश्चात भी अपनी प्रतिभा और समाज के प्रति योगदान के कारण अमर हो जाते हैं। विराट व्यक्तित्व और विराट कृतित्व के कारण डा.विष्णु विराट साहित्य जगत में अमर रहेंगे। दिल्ली से पधारे रामकुमार कृषक ने डा. विराट को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी कविता में परम्परा और आधुनिकता का प्रभाव बताया। उज्जैन से पधारे भैंरुलाल मालवीय ने कहा कि विराट जी के काव्य में प्राचीन एवं नवीन छंदों का निर्वाह हुआ है।





