अमृतसर । स्वर्ण मंदिर और जलियांवाला बाग के लिए पंजाब के प्रसिद्ध अमृतसर में शनिवार से दो दिवसीय हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस शुरू होने जदा रहा है। इस कॉन्फ्रेंस से इतर भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ रहे तनाव को लेकर बातचीत की संभावना जताई जा रही थी। मगर जानकारों का कहना है कि अब दोनों देशों के बीच वार्ता मुमकिन दिखाई नहीं दे रही है। साथ ही आतंकवाद को बढ़ावा देने की वजह से पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए भारत और अफगानिस्तान साथ मोर्चा संभालेंगे। आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरने का भारत और अफगानिस्तान के पास यह बेहतरीन मौका होगा। इस सम्मेलन के लिए शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना इसलिए भी नहीं बनती है कि पाकिस्तान ने इसके लिए निवेदन नहीं किया है, और जब पाकिस्तान ऐसा नहीं करेगा, भारत आगे नहीं बढ़ेगा। दूसरा, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जो कड़ा रुख अख्तियार किया है, उसके बाद द्विपक्षीय वार्ता की संभावना क्षीण ही नजर आती है।ऐसी संभावना है कि कॉन्फ्रेंस में भारत और अफगानिस्तान मिलकर आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को अलग-थल करने की तैयारी में है। भारत ने उरी में सैन्य ठिकाने पर हमले के बाद पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने करने का आह्वान किया था और हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में उसी दिशा में अपना प्रयास जारी रख सकता है। भारत की इस कोशिश में अफगानिस्तान का भी पूरा साथ मिलेगा, क्योंकि वह भी खुद को पड़ोसी देश की जमीन से प्रायोजित आतंकवाद का शिकार बताता रहा है। पाकिस्तानी सरजमीं से चल रहे आतंकवादी संगठनों ने अफगानिस्तान में हमले तेज कर दिए हैं। भारत सैन्य बेस पर आतंकी हमलों का मुद्दा उठाएगा।
अफगानिस्तान हार्ट ऑफ एशिया- इस्तांबुल प्रोसेस की सालाना बैठक में बाध्यकारी प्रतिबद्धता के साथ क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधक ढांचे के लिए गहरा दबाव बना सकता है।
हार्ट ऑफ एशिया- इस्तांबुल प्रोसेस युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान को बदलाव के दौर में उसकी मदद के लिए गठित किया गया एक मंच है। चौदह सदस्य देशों के शीर्ष अधिकारी आतंकवाद समेत इस क्षेत्र के समक्ष मौजूद अहम चुनौतियों पर चर्चा करने तथा अफगानिस्तान में स्थायी शांति एवं स्थायित्व लाने के तौर तरीके ढूढऩे के लिए बैठक करेंगे।रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति असरफभ घनी संयुक्त तौर पर सम्मेलन को संबोधित करेंगे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरतजा अजीज भी सम्मेलन में रविवार को शामिल होंगे। इससे पहले पीएम मोदी आज अमृतसर पहुंचेंगे। जहां वह कतर के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन नासेर बिन खलीफा अल-थानी से वार्ता करेंगे। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के बीमार होने की वजह से उनकी अनुपस्थिति में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वित्तमंत्री अरुण जेटली करेंगे।
सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि इस मौके पर भारत-पाक द्विपक्षीय वार्ता होती है या नहीं। हालांकि अजीज की अमृतसर यात्रा से पहले ही भारत कह चुका है कि वह पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में सीमापार आतंकवाद की निरंतरता को ‘नई सामान्य स्थिति’ के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेगा। उसने स्पष्ट किया कि निरंतर आतंकवाद के माहौल में वार्ता नहीं हो सकती।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिख समुदाय के इस प्रसिद्ध पवित्र शहर में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सभी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि भागीदार देशों, समर्थक देशों और संगठनों के प्रतिनिधि स्वर्ण मंदिर का दौरा करेंगे जिनमें चीन, ईरान, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं।आतंकवाद, चरमपंथ और गरीबी से निबटने के लिए अफगानिस्तान और इसके पड़ोसी देशों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए 2011 में शुरू की गई पहल में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और संयुक्त अरब अमिरात (यूएई) शामिल हैं।
साभार-khaskhabar.com






Related Items
लोहिया की बेचैन विरासत, कांग्रेस-मुक्त भारत का पहला खाका
क्या भारत में चुनाव जीतने का असली पासपोर्ट आज भी जाति का प्रमाणपत्र है?
भारत में भाप वाले इंजन से हाई स्पीड ट्रेन तक रेलवे की यात्रा