बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट की सख्त दखल और एक दर्जन निर्देशों के बावजूद आगरा शहर ताज महल को प्रदूषण मुक्त माहौल देने में असफल रहा है। लगातार बढ़ रही भीड़ तो खतरा है ही, साथ ही, सूखी यमुना ताज महल के लिए एक नया संकट है। सुप्रीम कोर्ट को खुद अपने निर्णयों और उन पर अमल के परिणामों का ऑडिट करना चाहिए।

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आगरा, जिसमें प्रेम का विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल सहित तीन विश्व धरोहर स्मारक हैं, विकास की आकांक्षाओं और विरासत संरक्षण की अनिवार्यता के बीच खुद को दुविधा में पा रहा है...

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भारत में ‘डेस्टिनेशन वेडिंग्स’ यानी गंतव्य शादियों के लिए आगरा एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। ताज सिटी की होटल सुविधाएं, कनेक्टिविटी, लजीज व्यंजन, दर्शनीय स्थलों, और कम खर्चे में बेहतर आयोजन, अनेक परिवारों को लुभा रहा है...

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भारत के प्रतिष्ठित धार्मिक केंद्रों पर बाल भिखारियों की संख्या में तेज गति से वृद्धि हो रही है। राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा लागू की गई 150 से अधिक कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद, भिखारियों की संख्या में यह वृद्धि चिंताजनक है...

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भारत में गाय अर्थव्यवस्था के महत्व को नकारा नहीं  जा सकता। विशेषकर, बृज मंडल जैसे क्षेत्र में गौ माता केवल पशुधन नहीं हैं, बल्कि उन्हें पवित्र माना जाता है। गौधन क्षेत्र की पशुपालन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। गायों की पूजा और सम्मान करने की पारंपरिक प्रथा आगरा और मथुरा जिलों की संस्कृति और परंपराओं में गहराई से निहित है...

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एक जमाना था जब आगरा की पहचान हुनरों और उद्योग धंधों से थी। सुबह, शाम जब सायरन बजते थे तो हजारों श्रमिक घटिया स्थित तेल मिल से लेकर गलीचा फैक्ट्री, यमुना किनारा और जॉन्स मिल जीवनी मंडी से ड्यूटी पर आते-जाते दिखाई देते थे। फाउंड्री उद्योग, आटा और तेल मिलों का दूर-दूर तक साम्राज्य फैला हुआ था...

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