बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

आगरा शहर के बीचों-बीच माल का बाजार, कश्मीरी बाजार, सेव का बाजार, और किसी वक्त की बदनाम बस्ती बसई ग्राम, अंधेरा होते ही संगीत की महफिलों से गुलजार हो जाते थे। ऊंची बालकनियों से ज्यादातर नेपाली सेक्स वर्कर्स अश्लील इशारे करके राहगीरों को बुलाती थीं। गंदी तंग गलियों से होकर दल्ले ग्राहकों को कोठे तक पहुंचाते थे। आए दिन पुलिसिया छापे होते थे, कोतवाली में वेश्याओं की पहचान परेड होती थी...

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दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम, प्रयागराज कुंभ के सफल समापन के बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साख आसमान छूएगी और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग्य उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित होंगे।

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पतियों द्वारा आत्महत्याओं की कुछ दुखभरी खबरों ने सुप्त भारतीय समाज में भूचाल सा ला दिया है। पत्नियों पर दोष मढ़ा जा रहा है कि उनकी फरमाइशों, मानसिक तनाव या उत्पीड़न से टूटने के पश्चात कई पतियों के सामने केवल आत्महत्या के रास्ते समाज से रुखसत होने का ही एक मात्र विकल्प बचा है। प्रतिदिन दस से ज्यादा आत्महत्याएं शादी की वजह से हो रही हैं...

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जून में हुए लोकसभा चुनावों में हार के बाद, क्या सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वांछित राजनीतिक लाभ प्राप्त करते हुए अपने कथानक और रणनीति में सुधार किया है? क्या आने वाले दिल्ली चुनावों में ध्रुवीकरण का नया मंत्र, ‘बटेंगे तो कटेंगे’ और भी धारदार और सटीक होगा, और भाजपा के लिए फायदे का सौदा बनेगा...

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बीते गुरुवार को चार खेल रत्न और 32 अर्जुन पुरस्कारों की घोषणा से खेल बिरादरी में जोश और उम्मीदें जागृत हुई हैं। यह मौका है भारत में वर्तमान खेल परिदृश्य पर गंभीरता से विचार करने का क्योंकि राजनैतिक दखलंदाजी और व्यावसायिकता ने खेल संस्कृति को गलत दिशा में मोड़ दिया है...

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भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की पहल कई चिंताएं पैदा कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव सुधारों के वास्तविक प्रयासों के बजाय ध्यान भटकाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है...

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