बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

आयकर में 12 लाख रुपये तक की आय पर छूट का ऐसा प्रचार हो रहा है, जैसे समाजवाद का सपना अब बस साकार हो ही गया है। भारत की कुल आबादी में कितने प्रतिशत लोग सालाना 12 लाख रुपये कमाते हैं? बड़े शहरों के बाहर, कितने पत्रकार हैं जो एक लाख रुपये महीने की तनख्वाह उठाते हैं?

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अब यमुना सूखी और प्रदूषित रोग ग्रस्त है। अधिकांश शहरवासी मां यमुना के महत्व और योगदान से परिचित नहीं हैं। नजीर अकबराबादी भी मायूस होंगे यमुना की पीड़ा देखकर। बादशाह शाहजहां का तो कलेजा ही बैठ जाएगा नदी की दुर्दशा देख कर...!

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आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव न केवल आम आदमी पार्टी के लिए निर्णायक हैं, बल्कि यह चुनाव भारत के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और विपक्षी एकता की दिशा को भी परिभाषित कर सकता है...

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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर यमुना नदी में जहर मिलाने का आरोप लगाया है, जिससे आक्रोश का तूफान खड़ा हो गया है। एजेंसियों ने उनके दावों को निराधार बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, लेकिन इस विवाद ने एक दर्दनाक सच्चाई को फिर से उजागर कर दिया है। सच्चाई यह है कि यमुना, जो कभी आगरा के लिए पवित्र जीवनरेखा थी, अब एक मरती हुई नदी है, जो अपने अस्तित्व के लिए हांफ रही है...

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ऐसी दुनिया जहां स्वतंत्र पत्रकारिता निहित स्वार्थों से खतरे में है, हिंसक दमन और प्रौद्योगिकी के ‘बिग ब्रदरली’ चालों से घिरी हुई है, वहां इतिहास की गूंज एक बार फिर सुनाई दे रही है...

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शहरों में शोर का ऐसा बवंडर उठ रहा है कि अब चैन की सांस लेना भी चुनौती बन गया है। दिन हो या रात, हर ओर गूंजती अलग-अलग ध्वनियां मानो एक शोरगुल की करामात रच रही हैं। चुनावी प्रचार से लेकर धार्मिक उत्सवों और शादियों तक, हर आयोजन में ध्वनि प्रदूषण के नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं।

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