बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

शहरी विकास की चमक ने कृषि क्षेत्र में निरंतर जारी सुधारों से हमारा ध्यान भटका दिया है। पिछले एक दशक में किसानों के लिए अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं और पहलों का असर अब दिखने लगा है। टेक्नोलॉजी, सौर ऊर्जा, मौसमी भविष्यवाणियां, लोन और फसल बीमा योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। सबसे ज्यादा फायदा डीबीटी, यानी निजी खातों में सीधा ट्रांसफर, से हो रहा है।

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मध्यकालीन युग में मथुरा, वृंदावन व गोकुल के श्री कृष्ण मंदिर भक्ति संगीत और गायन से गूंजते थे। ठाकुरजी तभी दर्शन देते थे जब घंटे दो घंटे गायन न हो जाए। आजकल सिर्फ भीड़, हो-हुल्लड़, कुंज गलियों में डेक पर फूहड़ गाने बजते हैं...

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शाही विरासत और विश्वविख्यात स्मारकों का शहर आगरा आज अव्यवस्थित शहरीकरण और बदहाल प्रशासन की मार झेल रहा है। स्मार्ट सिटी बनने का सपना साकार होने के बजाय शहर बदइंतजामी, अतिक्रमण और बुनियादी सुविधाओं की कमी से कराह रहा है...

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आयकर में 12 लाख रुपये तक की आय पर छूट का ऐसा प्रचार हो रहा है, जैसे समाजवाद का सपना अब बस साकार हो ही गया है। भारत की कुल आबादी में कितने प्रतिशत लोग सालाना 12 लाख रुपये कमाते हैं? बड़े शहरों के बाहर, कितने पत्रकार हैं जो एक लाख रुपये महीने की तनख्वाह उठाते हैं?

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अब यमुना सूखी और प्रदूषित रोग ग्रस्त है। अधिकांश शहरवासी मां यमुना के महत्व और योगदान से परिचित नहीं हैं। नजीर अकबराबादी भी मायूस होंगे यमुना की पीड़ा देखकर। बादशाह शाहजहां का तो कलेजा ही बैठ जाएगा नदी की दुर्दशा देख कर...!

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आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव न केवल आम आदमी पार्टी के लिए निर्णायक हैं, बल्कि यह चुनाव भारत के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और विपक्षी एकता की दिशा को भी परिभाषित कर सकता है...

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