शोधकर्ताओं ने एक उन्नत प्रकाश-चालित बहुक्रियाशील नैनोबोट विकसित किया है जो स्तन कैंसर के लक्षित उपचार में मदद कर सकता है...
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समीक्षा भारती न्यूज सर्विस, मीडियाभारती वेब सॉल्यूशंस का सिंडिकेशन विभाग है, जो भारत का प्रमुख ऑनलाइन मीडिया हाउस है और साल 2002 से मीडियाभारती.नेट और कई अन्य अग्रणी समाचार पोर्टल प्रकाशित कर रहा है।
शोधकर्ताओं ने एक उन्नत प्रकाश-चालित बहुक्रियाशील नैनोबोट विकसित किया है जो स्तन कैंसर के लक्षित उपचार में मदद कर सकता है...
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पिछले एक दशक में भारत की अंतरिक्ष यात्रा ‘विश्वास, विकास और जनकल्याण’ की भावना को प्रतिबिंबित कर रही है। भारत दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों में उभरकर सामने आया है। इस अवधि की प्रमुख उपलब्धियों में चंद्रयान-3 का चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतरना, आदित्य-एल1 का सौर मिशन तथा गगनयान और राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारियां शामिल हैं...
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एक दशक पहले, भारत के बिजली उत्पादन में सौर ऊर्जा का हिस्सा बहुत छोटा था। आज, यह देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है। वर्ष 2014 में लगभग तीन गीगावाट की स्थापित क्षमता से, इस क्षेत्र का विस्तार पचास गुना से भी अधिक हुआ है, और यह 30 जून तक 162.15 गीगावाट तक पहुंच गया...
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भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन पटरी पर उतार दी है। यह ट्रेन सबसे स्वच्छ ईंधन हाइड्रोजन का उपयोग करके स्वयं बिजली उत्पन्न करती है। उपयोग के समय इससे लगभग शून्य उत्सर्जन होता है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों को चलाने के तरीके में हुए विकास का एक नया अध्याय है, जो कोयले और भाप से स्वच्छ, अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत की व्यापक यात्रा को दर्शाता है...
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भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन-आधारित कर्षण प्रणालियों के एक आशाजनक विकल्प के रूप में उभरी है। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वचालित इंजन है जो चलायमान रहते हुए हाइड्रोजन का उपयोग करके अपनी बिजली उत्पन्न करता है। 17 जुलाई को उद्घाटन के साथ, हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन का परिचालन शुरू हो गया। यह उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत खंड पर चलेगी।
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देश का अंतरिक्ष क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का प्रक्षेपण इस परिवर्तन का प्रतीक है...
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