पवन गौतम

पवन गौतम समाचारएक्सप्रैस.कॉम के संपादक हैं।

वृन्दावन में मथुरा-वृन्दावन रोड पर रामकृष्ण मिशन अस्पताल से ठीक पहले दाईं ओर अंदर जाने वाली एक सड़क पर तराश वाला मंदिर मौजूद है। बाहर से देखने पर यह मंदिर कोई धर्मशाला जैसा लगता है लेकिन अंदर जाने पर एक अति सुन्दर मंदिर है। तराश वाला मंदिर की स्थापना राजर्षि श्री वनमाली रायबहादुर ने कराई थी। इस मंदिर में बहुत ही सुन्दर रंगीले बोलते जागृत श्री विग्रह हैं जिन्हें ‘जवाईं ठाकुर’ कहा जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां प्रतिदिन दो बार भगवान श्रीकृष्ण को हुक्का-पान का भोग लगाया जाता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी " सब्सक्राइब करें ", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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गोकुल महावन यमुना तट स्थित कृष्णकालीन चिंताहरण शिवालय एक प्रसिद्ध तीर्थाटन है। मथुरा जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर इस शिवालय में भगवान शिव ‘चिंताहरण महादेव’ के रूप में विराजमान हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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वृंदावन का नाम सुनते ही लोगों के मन में भगवान कृष्ण और राधा रानी का खयाल आता है, लेकिन यहां एक ऐसा मंदिर भी है जो भगवान श्रीकृष्ण का नहीं बल्कि महादेव शिव का है। इस मंदिर में महादेव कृष्ण की गोपी के रूप में विराजमान हैं और प्रतिदिन उनका महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार किया जाता है। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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हरिद्वार में आयोजित होने वाले भव्य कुंभ मेले से पहले वृंदावन में मिनी कुंभ मेला का आयोजन किया जाएगा। इसका शुभारंभ आगामी 16 फरवरी से होगा और यह 28 मार्च तक लगेगा। इसकी तैयारियां कई कार्यदायी संस्थाओं द्वारा जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं।

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कुल 84 कोस में फैले समूचे ब्रज मंडल का संबंध भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से है। यहां के कण-कण में कृष्ण का वास है। भगवान की लीलाओं के कई चिह्न इस क्षेत्र में बिखरे पड़े हैं। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में...

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राजस्थान राज्य की राजनीति में हमेशा राजसी आन, बान और शान का बोलबाला रहा है। लेकिन, यह वह दौर था जब आजादी के बाद राजतंत्र के लोकतंत्र में बदलने के चलते जनता पर राज करने वाले राजा और महाराजा अब जनसेवक बनकर सामने आने की कोशिशें कर रहे थे। ऐसे ही एक महाराजा मान सिंह जनसेवक बन अपनी जड़ें जमाने में जुटे हुए थे। पूरी कहानी पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें...

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