भारत में तेजी से हो रहा है इलेक्ट्रिक वाहनों के ‘इकोसिस्टम’ का उदय

भारत तेज़ी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और साफ़-सुथरे भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन रही है। साल 2016 के बाद से ईवी की बिक्री में लगभग 46 गुना बढ़ोतरी हुई है, जो ग्राहकों की पसंद में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। साल 2020 के दौरान 12 लाख अमेरिकन डॉलर का निर्यात साल 2024 में बढ़कर 8.4 करोड़ अमेरिकन डॉलर हो गया है। इससे भारत एक उभरते हुए ईवी केंद्र के तौर पर स्थापित हो रहा है।

पूरे भारत में भीड़-भाड़ वाले शहरों में रोज़ाना आने-जाने और छोटे शहरों में यात्रा के आखिरी चरण की सुविधा के तरीकों को पूरी तरह से नए सिरे से विचार किया जा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी है। यह तकनीकी बदलाव देश की जलवायु रणनीति और टिकाऊ परिवहन के विज़न के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सरकारी प्रोत्साहन, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और तेज़ी से हो रही तकनीकी प्रगति की वजह से, ईवी एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गए हैं और ऑटोमोबाइल उद्योग के भविष्य को आकार दे रहे हैं।

भारत में मोबिलिटी में हो रहा बदलाव न सिर्फ़ पर्यावरण के लिहाज़ से ज़रूरी है, बल्कि यह एक आर्थिक मौक़ा भी है। यह देश के सबसे बड़े और सबसे प्रभावी उद्योगों में से एक को नया रूप दे रहा है। यह बदलाव ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक रणनीतिक ज़रिया बनकर उभर रहा है। साथ ही, इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम हो रही है और अर्थव्यवस्था के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली, कुशल विकास की राह बन रही है।

कोविड के बाद के समय, यानी वित्तीय वर्ष 22 में एक अहम मोड़ तब आया जब खास नीतिगत प्रोत्साहन, ज़्यादा सब्सिडी और गाड़ियों की बेहतर उपलब्धता की वजह से ईवी को अपनाने की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी। इस दौरान बाज़ार में एक बड़ा ढांचागत बदलाव भी देखने को मिला। जहां वित्तीय वर्ष 2020-21 की शुरुआत में ई-रिक्शा का दबदबा था, वहीं जल्द ही इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स भी काफ़ी लोकप्रिय हो गए। वित्तीय वर्ष 25 तक, वे एक प्रमुख सेगमेंट बन गए, जो अनौपचारिक, शेयर्ड मोबिलिटी से मुख्यधारा के निजी और कमर्शियल इस्तेमाल की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत था।

आज दुनियाभर में लोग ईवी को तेज़ी से अपना रहे हैं। बेहतर ड्राइविंग रेंज और अच्छी कीमत वाले कई मॉडल बाज़ार में आ रहे हैं। साथ ही, सार्वजनिक तौर पर चार्जिंग अवसंरचना का भी तेज़ी से विस्तार हो रहा है। भारत में मज़बूत नीतिगत समर्थन, बढ़ती बिक्री और रजिस्ट्रेशन के ज़रिए यह तेज़ी देखी जा रही है। घरेलू विनिर्माण और चार्जिंग नेटवर्क के बढ़ते इकोसिस्टम से इसे और बढ़ावा मिल रहा है, जिससे ईवी को अपनाने वालों की संख्या बढ़ रही है।

साल 2016 में लगभग 50 हजार ईवी की मामूली बिक्री के मुकाबले, साल 2025 में 23 लाख इकाइयां बेची गईं। यह भारत के ईवी मार्केट में 46 गुना बढ़ोतरी को दिखाता है। भारत की यह बढ़ोतरी वैश्विक प्रदर्शन से कहीं ज़्यादा रही है। जहां वैश्विक स्तर पर ईवी की बिक्री लगभग 20 गुना बढ़ी और साल 2016 की 9,18,000 से बढ़कर 2024 में 1.878 करोड़ हो गई।

साल 2025 में, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा ईवी बाज़ार बनकर उभरा। चार लाख से ज़्यादा इकाइयों के साथ, इसने देश की कुल ईवी बिक्री का 18 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया। इसके बाद महाराष्ट्र में 2.66 लाख इकाइयां, कुल 12 प्रतिशत, और कर्नाटक में दो लाख इकाइयां, कुल बिक्री का नौ प्रतिशत, का स्थान रहा।

साल 2020 में भारत में ईवी के इस्तेमाल का स्तर वैश्विक स्तर के मुकाबले सिर्फ़ पांचवां हिस्सा था। 2024 में यह बढ़कर वैश्विक स्तर के दो बटा पांचवें हिस्से से भी ज़्यादा हो गया। इस तरक्की में सबसे बड़ा योगदान 2025 में बिके मोटर लगे टू-व्हीलर्स, 12.8 लाख इकाइयां, और थ्री-व्हीलर्स, आठ लाख इकाइयां, का रहा।

पिछले दशक में ईवी रजिस्ट्रेशन में 62 प्रतिशत से ज़्यादा की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के साथ काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। यह ईवी को अपनाने की रफ़्तार में तेज़ी को दिखाता है। नीतिगत समर्थन, तकनीक में तरक्की और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में ग्राहकों का बढ़ता भरोसा इसके मुख्य कारण हैं।

हाल के वर्षों में घरेलू स्तर पर बड़ी कामयाबी जाने के बाद, भारतीय ईवी ने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी अच्छी-खासी बढ़त बनानी शुरू कर दी है। इसका निर्यात 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 84 लाख अमेरिकी डॉलर हो गया है। निर्यात के प्रमुख देशों में नेपाल, इंडोनेशिया और जापान शामिल हैं।

अवसंरचना के मामले में, भारत का सार्वजनिक तौर पर चार्जिंग नेटवर्क तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के अनुसार, जुलाई माह तक मौजूद 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में से 16,561 स्टेशनों पर फ़ास्ट ईवी चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है।

भारत सिर्फ़ असेंबली करने वाले बाज़ार से बदलकर एक बड़े ईवी विनिर्माण केन्द्र के तौर पर विकसित हो रहा है। सप्लायर इकोसिस्टम के बढ़ने से अब देश में ही बैटरी पैक, मोटर, ड्राइवट्रेन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग और चार्जिंग इक्विपमेंट का उत्पादन हो रहा है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, टीवीएस और बजाज ऑटो जैसी बड़ी मूल उपकरण निर्माता कंपनियां अनुसंधान एवं विकास, गीगाफ़ैक्ट्री और खास ईवी प्लेटफ़ॉर्म में निवेश करके अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं।

साथ ही, विनफ़ास्ट, टेस्ला और कोरिया व जापान की बड़ी वैश्विक बैटरी कंपनियां भी भारत में बड़े पैमाने पर विनिर्माण की संभावनाएं तलाश रही हैं। इस विस्तार से स्थानीयता मज़बूत हो रही है, लागत के मामले में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ रही है और भारत वैश्विक ईवी सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बन रहा है।

भारतीय स्टार्टअप्स ईवी की संभावनाओं को पहचान रहे हैं। वे चार्जिंग अवसंरचना की उपलब्धता को बढ़ावा दे रहे हैं, बैटरी संबंधी नवाचार में सुधार कर रहे हैं, कम लागत वाले विनिर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं और डेटा-आधारित समाधान पेश कर रहे हैं। भारत में अभी लगभग 400 ईवी स्टार्टअप काम कर रहे हैं और वे भारत के बदलते ईवी इकोसिस्टम को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इसके अलावा, आगे बढ़ रहा ईवी इकोसिस्टम ड्राइविंग के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें वॉइस-इनेबल्ड नेविगेशन, रियल-टाइम ट्रैफ़िक की जानकारी और इंटेलिजेंट रूट प्लानिंग जैसे फ़ीचर अहम हैं। एआई वॉइस-बेस्ड कंट्रोल, कनेक्टेड फ़ीचर और एक्सेसिबिलिटी पर केंद्रित क्रियाकलापों के ज़रिए सुरक्षित और ज़्यादा समावेशी मोबिलिटी में भी योगदान दे रहा है।

इस सेक्टर में निवेश की गतिविधियां भी ज़ोरदार रही हैं। भारत के ईवी इकोसिस्टम ने वित्त वर्ष 2025 में 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की रकम जुटाई, जो 2024 के मुकाबले लगभग 27 प्रतिशत ज़्यादा है। इस वित्तपोषण का ज़्यादातर हिस्सा ईवी बनाने वाली कंपनियों को मिला, जिन्होंने करीब 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर हासिल किए। इसमें दिल्ली ईवी निवेश के लिए सबसे आगे रहने वाला शहर बनकर उभरा।

दिसंबर 2025 तक, 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ईवी नीति अधिसूचित कर दी थीं, जबकि चार और राज्यों में ये ड्राफ़्ट स्टेज पर थीं। 15–25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी, प्राथमिकता के आधार पर ज़मीन का आवंटन, स्टाम्प ड्यूटी में छूट और 100 प्रतिशत तक एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट जैसे प्रोत्साहन निवेशकों की लागत को कम करते हैं।

तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य बड़े ईवी हब बन गए हैं और मज़बूत विनिर्माण इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रहे हैं। दिल्ली की ईवी नीति भारत की सबसे प्रगतिशील ईवी नीतियों में से एक है। इसका मकसद गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और शहर में हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

जून माह में, सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में पुरानी और ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को बदलने के लिए एक व्यापक योजना को मंज़ूरी दी। इस पहल का मकसद हवा की गुणवत्ता में सुधार करना और साफ़-सुथरी मोबिलिटी को बढ़ावा देना है। 9,585 करोड़ रुपये के बजट वाली इस दो साल की योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर में लगभग 2.07 लाख कमर्शियल गाड़ियों को बदला जाएगा, जिनमें 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं।

धीरे-धीरे, भारत खुद को आयात पर निर्भर बाज़ार से बदलकर ईवी विनिर्माण के लिए एक वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक केन्द्र बना रहा है। यह ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात में कमी और 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य हासिल करने की उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

भारत का ईवी बाजार, जिसका मूल्य 2025 में 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर था, उसके 2034 तक 54.94 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 191.04 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।  भारत का ईवी बैटरी बाजार 2025 में 2.71 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2034 तक 21.70 प्रतिशत की सीएजीआर से 15.90 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक कुल गाड़ियों की बिक्री में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की हो, जो ग्लोबल ईवी 30@30 पहल के अनुरूप है। 2030 तक पूरे भारत में 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करके ईवी इकोसिस्टम को मज़बूत किया जा रहा है।

मांग और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन, स्थानीयकरण नीति और शुरुआती चार्जिंग अवसंरचना की वजह से भारत बड़े पैमाने पर काम करने के एक अहम दौर में पहुंच गया है। जैसे-जैसे वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव हो रहा है, उम्मीद है कि भारत ईवी विनिर्माण में निवेश के लिए सबसे आकर्षक जगहों में से एक बन जाएगा।

घरेलू क्षमताएं मज़बूत होने के साथ, भारत एक निर्यात केन्द्र के तौर पर उभरने के लिए तैयार है। यह बात इलेक्ट्रिक दो-पहिया, कॉम्पैक्ट ईवी, बैटरी पैक और मुख्य ड्राइवट्रेन उपकरणों जैसे कई तरह के उत्पादों पर लागू होती है। इसे अनुसंधान एवं विकास में निवेश और वैश्विक साझेदारी से भी बढ़ावा मिल रहा है।

भारत में मोबिलिटी एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रही है। मांग तेज़ी से बढ़ रही है, विनिर्माण का दायरा बढ़ रहा है और तकनीक के मामले में क्षमताएं बेहतर हो रही हैं। नतीजतन, देश अनुसंधान एवं विकास और ईवी विनिर्माण के लिए तेज़ी से एक वैश्विक केन्द्र के तौर पर उभर रहा है। बेहतर वित्तीय सुविधा, बढ़ती जागरूकता, तकनीक में तरक्की, भरोसेमंद चार्जिंग और कुशल कार्यबल जैसे अहम कारक भारत में ईवी को अपनाने की प्रक्रिया को तेज़ कर रहे हैं। सुधारों पर आधारित नीति का माहौल बड़े पैमाने पर मज़बूत और टिकाऊ फ़ायदा भी देता है।

आगे का रास्ता सप्लाई चेन के बेहतर समायोजन, बैटरी के विनिर्माण में तेज़ी से स्थानीयकरण और मज़बूत चार्जिंग अवसंरचना से तय होगा। ये सभी मिलकर वैश्विक ईवी क्षेत्र में भारत की नेतृत्व को स्थापित करने के लिए तैयार हैं।



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